जहानाबाद नगर : जिले के सबसे बड़े अस्पताल में ड्रेसर के नहीं रहने से मरीजों को मरहम-पट्टी कराने में भी परेशानी होती है. इमरजेंसी का ड्रेसिंग रूम चतुर्थवर्गीय कर्मियों के रहमोकरम पर संचालित है. जहां मरीजों का मरहम-पट्टी भी चतुर्थ वर्गीय कर्मी ही करते हैं. कई बार तो चिकित्सक को खुद ही मरहम-पट्टी के साथ स्टिच तक लगाना पड़ता है.
सदर अस्पताल में नहीं है ड्रेसर
जहानाबाद नगर : जिले के सबसे बड़े अस्पताल में ड्रेसर के नहीं रहने से मरीजों को मरहम-पट्टी कराने में भी परेशानी होती है. इमरजेंसी का ड्रेसिंग रूम चतुर्थवर्गीय कर्मियों के रहमोकरम पर संचालित है. जहां मरीजों का मरहम-पट्टी भी चतुर्थ वर्गीय कर्मी ही करते हैं. कई बार तो चिकित्सक को खुद ही मरहम-पट्टी के साथ […]

ऐसे में चिकित्सक भी अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर पाते हैं. जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई स्तरों पर कार्य किया जा रहा है लेकिन मैन पावर की कमी के कारण इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है. सदर अस्पताल जहां जिले के सभी प्रखंडों से तो मरीज आते ही हैं, अरवल जिले के साथ ही पटना, गया व नवादा जिले से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं.
ऐसे में यहां पर्याप्त संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों की आवश्यकता रहती है. हालांकि सदर अस्पताल में ड्रेसर की कमी से अस्पताल प्रबंधन भी परेशान है. यहां एक ड्रेसर पदस्थापित थे जो कि सेवानिवृत्त हो गये हैं.
उनकी सेवानिवृत्ति के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा प्रयास किया गया कि उन्हें कॉन्ट्रैक्ट पर रख लिया जाये ताकि अस्पताल का कार्य चलता रहा लेकिन विभागीय पचड़ों के कारण यह संभव नहीं हो पाया. ऐसे में अस्पताल प्रशासन द्वारा एक ओटी असिस्टेंट को इमरजेंसी वार्ड में प्रतिनियुक्त किया गया है लेकिन वह भी एक शिफ्ट में ही काम कर घर चला जाता है. ऐसे में अन्य दो शिफ्टों में ड्रेसर व ओटी असिस्टेंट नहीं रहने के कारण चतुर्थ वर्गीय कर्मी के कंधों पर मरहम-पट्टी से लेकर अन्य सभी तरह की जिम्मेवारी होती है.