आशा व एएनएम के माध्यम से लोगों को किया जा रहा जागरूक
जहानाबाद नगर : जिले में मस्तिष्क ज्वर की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है. इससे बचाव के लिए जिले के ऐसे इलाकों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है, जहां पर मस्तिष्क ज्वर फैलने की आशंका है. इसके साथ ही सदर अस्पताल में इलाज की भी समुचित व्यवस्था की गयी है.
ऐसे मरीजों के लिए नशामुक्ति केंद्र में अलग वार्ड बनाया गया है. साथ ही सभी चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों को इस बीमारी के इलाज के लिए उठाये जाने वाले कदमों तथा दवाओं की उपलब्धता के बारे में भी बताया गया है. जिला स्तर पर एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, जहां से पूरे जिले में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों पर नजर रखी जा सके. प्रखंडों में भी चिकित्सकों को दवाओं की उपलब्धता और बीमारी के इलाज के बारे में अवगत कराया गया है. बताया गया कि मस्तिष्क ज्वर एक गंभीर बीमारी है.
समय पर इलाज मिलने से पीड़ित मरीज जल्द स्वस्थ हो जाता है. अत्यधिक गर्मी एवं नमी के मौसम में यह बीमारी ज्यादा फैलती है. इसके चपेट में एक से पंद्रह वर्ष तक के बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं. रविवार को जिले के कसवां गांव के संतोष कुमार की मां इस बीमारी से पीड़ित मिली. उनका सदर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद विशेष इलाज के लिए पीएमसीएच भेजा गया.
मस्तिष्क ज्वर की पहचान एवं लक्षण
सिर दर्द, तेज बुखार आना.
अर्धचेतना एवं मरीजों में पहचानने की क्षमता नहीं होना.
बच्चे का बेहोश हो जाना.
शरीर में चमकी होना या हाथ पैर में थरथराहट होना.
पूरे शरीर या किसी खास अंग में लकवा मार देना या हाथ-पैरों का अकड़ जाना.
बच्चे का शारीरिक संतुलन ठीक नहीं होना.
पहचान होने पर ये न करें करें
बच्चे को कंबल या गर्म कपड़ों में न लपेटें.
बच्चे की नाक बंद नहीं करें.
बेहोशी की अवस्था में बच्चे के मुंह में कुछ नहीं दें.
बच्चे की गर्दन झुकी हुई न रखें.
मरीज के बिस्तर पर न बैठे और मरीज को बिना वजह तंग न करें, वातावरण शांत रखें.
पहचान होने पर ये करें
तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें एवं पंखे की हवा करें.
पैरासिटामोल की दवा दें.
बच्चा बेहोश नहीं है तब साफ पानी में ओआरएस का घोल बनाकर पिलाएं.
बेहोशी की अवस्था में बच्चे को हवादार स्थान पर रखें.
शरीर से कपड़े हटा दें एवं छायादार स्थान पर लिटाएं.
मरीज को यदि झटके आ रहें हों तो उसके दांतों के बीच साफ कपड़ों का एक गोला बनाकर रखें.
बरतें ये सावधानियां
जेई का टीका अवश्य लगवाएं.
खाने पीने में उबले हुए पानी का उपयोग करें.
जल जमाव नहीं होने दें.
तालाब या पोखर के पानी का उपयोग नहीं करें.
खाने से पूर्व एवं शौच के बाद साबुन से हाथ साफ करें.
बिस्तर पर मच्छरदानी का प्रयोग करें.
जमे हुए पानी में केरोसिन की कुछ बूंदें डाल दें.
