पीजी रेलखंड की ट्रेनों में पैसेंजरों की बढ़ी भीड़

जहानाबाद : दशहरा पर्व संपन्न हो गया. राज्य के विभिन्न जिलों एवं दूसरे प्रांतों में सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में काम करने वाले एवं तरह-तरह के व्यवसाय करने वाले लोग अपने परिवार के साथ काम पर लौटने लगे हैं. इसको लेकर पटना-गया रेलखंड पर चलने वाली एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में भीड़ बढ़ गयी है. […]

जहानाबाद : दशहरा पर्व संपन्न हो गया. राज्य के विभिन्न जिलों एवं दूसरे प्रांतों में सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में काम करने वाले एवं तरह-तरह के व्यवसाय करने वाले लोग अपने परिवार के साथ काम पर लौटने लगे हैं. इसको लेकर पटना-गया रेलखंड पर चलने वाली एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में भीड़ बढ़ गयी है. खासकर साधारण ट्रेनों में यात्रियों की संख्या काफी रहने से लोगों को गया या पटना जाने में बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. लोग धक्का-मुक्की के बीच यात्रा करने पर विवश हैं.

बता दें कि दशहरा के अलावा मुहर्रम के मौके पर हजारों की संख्या में लोग विभिन्न स्थानों से अपने गृह जिला जहानाबाद आये थे. जिले के शहरी और ग्रामीण इलाके के अलावा अरवल जिला क्षेत्र के भी लोग ट्रेनों से यात्रा कर जहानाबाद पहुंचे थे और सड़क मार्गों से अपने गंतव्य तक जाकर पर्व-त्योहार का परिवार के साथ आनंद उठाया था. अब उन्हें अपने काम पर लौटने की चिंता है.

जहानाबाद स्टेशन पर प्राय: अधिकांश ट्रेनों में देखा जा रहा है कि लोग दिल्ली,कोलकाता, पूणे, बैंगलोर, रांची, धनबाद, जमशेदपुर आदि स्थानों पर जाने के लिए पहले पटना या गया पहुंचते हैं. इन दोनों जंक्शनों तक जाने के लिए पटना-गया रेलखंड पर ट्रेनों का सहारा लिया जा रहा है. परिणाम यह है कि भीड़ के कारण प्लेटफॉर्म पर अफरा-तफरी का माहौल है. चूंकि जहानाबाद स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव मात्र दो मिनट के लिए होता है. कहीं ट्रेन छुट न जाये इसको लेकर डिब्बे में सवार होने के लिए आपाधापी मची रहती है. भीड़ के कारण कई लोगों की ट्रेन छुट भी जा रही है जो सड़क मार्ग से गया-पटना तक पहुंच कर आगे ही यात्रा आरंभ कर रहे हैं.

रांग साइड से सवार हो रहे हैं यात्री, बना रहता है खतरा :विभिन्न राज्यों में जाने वाले महिला-पुरुष यात्रियों के अलावा वैसे यात्रियों की संख्या हजारों में है जो दैनिक यात्रा करते हैं. इस वजह से फिलहाल भीड़ की अधिकता के कारण बड़ी संख्या में लोग रांग साइड से ट्रेन के डिब्बे में सवार होते हैं. उनके समक्ष अनहोनी की आशंका बनी रहती है.
लोग जल्दबाजी में एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने-आने के लिए ओवर ब्रिज के बजाय रेलवे ट्रैक को क्रॉस करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं. अक्सर यह देखा जा रहा है कि ट्रेन नजदीक आ जाती है . बावजूद इसके लोग जान जोखिम में डाल कर रेलवे ट्रैक पार करते हैं. ऐसी स्थिति से कभी भी बड़ी घटना होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है.
नहीं मिल रहा कन्फर्म टिकट, तत्काल टिकट लेने के लिए मची है अफरा-तफरी :प्रतिदिन रिजर्वेशन काउंटर पर भीड़ लग रही है. लोगों को देश के विभिन्न स्थानों तक जाने के लिए कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा है. जिन लोगों ने पूर्व से टिकट की व्यवस्था कर रखी है. उन्हें तो कोई दिक्कत नहीं लेकिन जिनके पास लौटने के लिए टिकट नहीं है उन्हें तत्काल टिकट मिलने की ही आस है लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. कई ट्रेनों में 300-400 तक वेटिंग की स्थिति है. ऐसी हालत में आरक्षण कराने के लिए तत्काल टिकट बनवाने के लिए लोगों में आपाधापी मची है. स्थिति यह है कि जरूरतमंद लोग तीन-चार बजे भोर से ही आरक्षण टिकट काउंटर पर लाइन लगाना शुरू कर देते हैं. सात-आठ घंटे के इंतजार के बाद एक या दो व्यक्ति को ही कन्फर्म टिकट मिल पाता है. सैकड़ों की संख्या में प्रतिदिन लोग निराश वापस लौट जा रहे हैं. इसको लेकर लोग बेहद चिंतित हैं.
चेतावनी का भी नहीं हो रहा असर
रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा भीड़ की स्थिति में लगातार लाउडस्पीकर से एनाउंस किया जाता है कि लोग ट्रैक पार नहीं करें. ओवरब्रिज का उपयोग करें लेकिन इसका असर व्यापक यात्रियों पर नहीं पड़ रहा है. लोग जल्दबाजी में और सिविक सेंस की कमी रहने के कारण रेलवे प्रशासन के द्वारा दी जा रही चेतावनी पर तनिक भी ध्यान नहीं देते. मनाही के बावजूद भी रेलवे ट्रैक पार करते हैं. इस दौरान लोग गिर भी जाते हैं जिन्हें दूसरे यात्री सहारा देकर उठाते हैं. ऐसी स्थिति किसी भी यात्री के लिए उचित नहीं है. इस कारण लोगों के लिए ऊपरी पुल का सहारा लेना ही मुनासिब है.

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