जहानाबाद (नगर) : ग्रामीणों के जीवन में सुधार कर दूसरों के लिए एक आदर्श गांव के रूप में प्रस्तुत करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में सांसद आदर्श ग्राम योजना शुरू की गयी थी.
इस योजना के तहत सभी सांसदों द्वारा एक-एक गांव को गोद लिया गया था, ताकि उस गांव को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जा सके. स्थानीय सांसद डाॅ अरुण कुमार द्वारा मखदुमपुर प्रखंड के धराउत को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने के लिए चयनित किया गया था. इस गांव को मॉडल गांव के रूप में विकसित करने की जिम्मेवारी उठायी गयी थी, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद इस गांव का समुचित विकास नहीं हो सका है.
सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गांव में बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने, पेयजल, शौचालय, स्कूल, अस्पताल के अलावा अन्य जरूरी सुविधाएं बहाल की जानी थीं, लेकिन धराउत में आदर्श के रूप में सिर्फ 22 लाख की लागत से एक किसान प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण कराया गया.
केंद्र पर कुछ लोगों का अवैध कब्जा : इस केंद्र का उपयोग भी किसान नहीं कर पा रहे हैं.केंद्र में कुछ लोगों का अवैध कब्जा है. वहीं, गांव में पेयजल के लिए पानी टंकी चालू कराने, सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराने आदि योजनाएं भी बनी थीं, लेकिन ये योजनाएं पूरी नहीं हो सकीं. आदर्श ग्राम का समग्र विकास एक वर्ष में किया जाना था, लेकिन तीन वर्षों के बाद भी हाल पहले के जैसा ही है. सांसद को अपने कार्यकाल के दौरान हरेक वर्ष एक-एक गांव को मॉडल के रूप में विकसित करना था, लेकिन एक गांव भी अब तक मॉडल नहीं बन सका. ऐसे में जिले के अन्य गांवों का समुचित विकास होना संभव नहीं दिखता है.
सांसद आदर्श ग्राम योजना का उद्देश्य समग्र विकास के लिए नेतृत्व की प्रक्रिया को गति प्रदान करना, ग्रामीणों की गुणवत्ता में सुधार लाना, स्थानीय स्तर के विकास और प्रभावी स्थानीय शासन के मॉडल इस प्रकार बनाना जिससे अन्य पंचायतें प्रेरित और प्रोत्साहित होकर उस मॉडल को सीखने एवं अपनाने को तैयार हो. आदर्श ग्राम को स्थानीय विकास के ऐसे केंद्र के रूप में विकसित करना था, जो अन्य ग्राम पंचायतों को प्रशिक्षित कर सके, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.
