बढ़ते ठंड में लकवा से ग्रसित होने का रहता है खतरा, बीपी मरीज बरतें सावधानी

जिले में बीते दो दिनों से कड़ाके की ठंड पड़ रही है. इस कड़ाके की ठंड में कम उम्र से लेकर बुजुर्गों में लकवा होने का डर बना रहता है.

जमुई. जिले में बीते दो दिनों से कड़ाके की ठंड पड़ रही है. इस कड़ाके की ठंड में कम उम्र से लेकर बुजुर्गों में लकवा होने का डर बना रहता है. ठंड में लकवा से बचाव को लेकर शहर के बोधबन तालाब स्थित शिवागंन फिजियोथेरेपिस्ट के चिकित्सक डॉ ए मोदी ने बताया कि ठंड के मौसम में बीपी के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है, क्योंकि बीपी के मरीजों को लकवा से ग्रस्त होने का खतरा अधिक बना रहता है. डॉ मोदी ने बताया कि लकवा का मुख्य कारण हाई बीपी व नस में कमजोरी है. लकवा का इलाज फिजियोथेरेपी के माध्यम से ही किया जा सकता है.

गठिया बात के मरीजों को भी होती है परेशानी

फिजियोथेरेपिस्ट डॉ ए मोदी द्वारा बताया गया कि ठंड के मौसम में गठिया बात से पीड़ित मरीजों की भी परेशानी बढ़ जाती है. ऐसे मौसम में पीड़ित मरीजों को विशेष ध्यान रखना होता है. शरद ऋतु गठिया बात के रोगियों के लिए सबसे अनुकूल मौसम हो सकता है, जबकि सर्दी और बसंत सबसे चुनौतीपूर्ण हैं. एक अध्ययन में पाया गया कि नमी दर्द को बढ़ा देता है. मौसमी परिवर्तन से गठिया बात के अलावा घुटने का दर्द, बांह का दर्द के साथ नस-हड्डी से जुड़े अन्य बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है. ऐसे में फिजियोथेरेपिस्ट का सहारा लेना आवश्यक हो जाता है.

खान-पान का रखें ध्यान

ठंड के मौसम में लकवा और गठिया बात के रोगियों को खान-पान में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है. डॉ ए मोदी की मानें तो गठिया बात के रोगियों को शुद्ध शाकाहारी भोजन लेना चाहिए. साथ ही शाकाहारी भोजन में भी चाय, मसूर का दाल, पालक साग, गाजर, राजमा, टमाटर के सेवन से बचना चाहिए और समय-समय पर फिजियोथेरेपी कराते रहने से राहत मिलती है. उन्होंने बताया कि घुटना का दर्द, बांह का दर्द सहित नस और हड्डियों से संबंधित सभी तरह के मरीजों को दवा के साथ फिजियोथेरेपी ज्यादा कारगर साबित होता है.

आधुनिक मशीन से रोगियों का किया जाता है उपचार

शिवांगन फिजियोथेरेपी सेंटर में डॉ ए मोदी द्वारा हड्डी व नस से संबंधित सभी रोगों का इलाज आधुनिक मशीन से फिजियोथेरेपी कर किया जाता है. डॉ ए मोदी द्वारा बताया गया कि जिले के सोनो प्रखंड क्षेत्र के गंदर गांव निवासी जगदेव शर्मा, ओम प्रकाश शर्मा, नवादा जिले के कौवाकोल पाली गांव निवासी रामचंद्र साव तथा खैरा प्रखंड क्षेत्र के बगंदर गांव निवासी राजेंद्र यादव जो बीते तीन माह से लकवा से ग्रसित थे, जिसे महज दस दिन के थेरेपी उपचार से ही वे चलने फिरने लगे. डॉ ए मोदी द्वारा बताया गया कि यहां आधुनिक तरीके से लकवा, घुटने का दर्द, गठिया बात के रोगियों का फिजियोथेरेपी कर उनका उचित उपचार किया जाता है.

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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