रमजानुल मुबारक का पाक महीना शुरू, रोजेदारों ने रखा पहला रोजा
रमजानुल मुबारक का पवित्र महीना शुरू होते ही मुस्लिम समाज में उत्साह व खुशी का माहौल है.
By PANKAJ KUMAR SINGH | Updated at :
अलीगंज. रमजानुल मुबारक का पवित्र महीना शुरू होते ही मुस्लिम समाज में उत्साह व खुशी का माहौल है. गुरुवार को अलीगंज समेत आसपास के क्षेत्रों में रोजेदारों ने पहला रोजा रखकर संध्या समय इफ्तार किया. खासकर बच्चों और युवाओं में इस पाक महीने को लेकर विशेष उत्साह देखा गया. अलीगंज जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोबिन और मौलाना ऐनुल हक ने बताया कि रमजान के महीने में हर फर्ज इबादत का सवाब सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है. हदीसों में वर्णित है कि इस महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिये जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिये जाते हैं, इसलिए इसे बरकत और रहमत का महीना कहा जाता है.
रोजा न रखने वालों के लिए निर्देश
बुजुर्ग, बीमार या लाचार व्यक्ति यदि रोजा रखने में असमर्थ हों तो वे एक रोजे के बदले जरूरतमंदों को भोजन या अनाज दे सकते हैं. जानबूझकर रोजा न रखने को गंभीर माना गया है. ईद का चांद नजर आने से पहले सदका-ए-फितर अदा करना जरूरी बताया गया है.
तीन असरों में बंटा है रमजान
धार्मिक जानकारों के अनुसार, रमजान को तीन असरों में बांटा गया है. पहला असरा (1-10 रमजान) रहमत का, दूसरा (11-20 रमजान) मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का और तीसरा (21-30 रमजान) जहन्नुम से निजात का होता है. शुरुआती दस दिनों में की गई इबादत पर विशेष रहमत बरसने की मान्यता है. रमजान के पहले दिन मस्जिदों में नमाज और इफ्तार के दौरान विशेष रौनक देखी गई. रोजेदारों ने देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी.