जमुई के भगलपुरा मुसहरी गांव में 7 साल में ही दम तोड़ गयी नल-जल योजना, 2 किमी पैदल चलकर पानी ला रहे ग्रामीण
Jamui News : सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल का जल’ योजना जिस गांव में लोगों की प्यास बुझाने के लिए शुरू की गई थी, वहीं आज सैकड़ों लोग एक-एक बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं. भीषण गर्मी के बीच महादलित बस्ती के करीब 400 ग्रामीण रोजाना दो किलोमीटर पैदल चलकर पीने का पानी ला रहे हैं. लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई योजना वर्षों से ठप पड़ी है, जबकि जिम्मेदार विभाग अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाल पाया है.
बरहट, जमुई से शशिलाल की रिपोर्ट
Jamui News : बरहट प्रखंड की पांड़ों पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या-12 स्थित भगलपुरा मुसहरी गांव में नल-जल योजना पूरी तरह ठप हो चुकी है. गांव के महादलित टोले में रहने वाले करीब 400 लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. जलापूर्ति बंद होने के कारण ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है. गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है.
लाखों की योजना बनी शोपीस
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लाखों रुपये की लागत से नल-जल योजना स्थापित की गई थी. शुरुआत में लोगों को इसका लाभ मिला, लेकिन धीरे-धीरे योजना बदहाल होती चली गई. आज स्थिति यह है कि पानी फिल्टर करने वाली टंकी में रिसाव है, मुख्य जल टंकी क्षतिग्रस्त है और पाइपलाइन भी जगह-जगह टूट चुकी है. पूरा ढांचा गांव में केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गया है.
रोज दो किलोमीटर दूर से लाना पड़ रहा पानी
नल-जल योजना बंद होने के बाद ग्रामीणों के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. लोगों को रोजाना लगभग दो किलोमीटर दूर खादीग्राम स्थित मां जी समाधि स्थल के समीप एक निजी बोरिंग से पानी लाना पड़ता है. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है.
2017 में शुरू हुई योजना, 2022 में बिगड़ने लगे हालात
नल-जल योजना के संचालक देवू मांझी ने बताया कि गांव में वर्ष 2017 में जलापूर्ति शुरू हुई थी. वर्ष 2022 में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और पानी फिल्टर करने वाली टंकी में रिसाव शुरू हो गया. इसके बाद भी किसी तरह कुछ घरों तक पानी पहुंचता रहा. बाद में आए आंधी-तूफान में मुख्य टंकी भी क्षतिग्रस्त हो गई, जिसके बाद जलापूर्ति पूरी तरह बंद हो गई.
अधिकारियों को कई बार दी गई जानकारी
ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पीएचईडी विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया. निरीक्षण के दौरान भी अधिकारियों को स्थिति दिखाई गई, लेकिन अब तक न तो नई टंकी लगाई गई और न ही पाइपलाइन की मरम्मत कराई गई. इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
सूख गया कुआं, स्टैंड पोस्ट भी बेकार
गांव में मांझी समुदाय के लगभग 85 परिवार रहते हैं. ग्रामीण महेंद्र मांझी, योगेंद्र मांझी और अन्य लोगों ने बताया कि नल-जल योजना बंद होने के बाद वे गांव के एकमात्र कुएं पर निर्भर थे. लेकिन भीषण गर्मी में वह भी सूख गया. गांव में लगे स्टैंड पोस्ट भी बेकार पड़े हैं. उनमें न तो टोंटी है और न ही पानी आता है.
पीएचईडी ने मरम्मत का दिया आश्वासन
इस संबंध में पीएचईडी के एसडीओ रंजीत कुमार ने कहा कि उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं थी. उन्होंने आश्वासन दिया कि स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर जल्द ही आवश्यक मरम्मत कार्य कराया जाएगा और गांव में जलापूर्ति बहाल करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी.