महिलाओं की सुनी गोद भरती हैं नावांबांध की मां दुर्गा

सनातन परंपरा में शक्ति की आराधना उनके अलग-अलग रूपों में की जाती है. कोई मां की आराधना धन्य धान्य की प्राप्ति के लिए करता है, तो कोई शक्ति, रक्षा व यश की प्राप्ति को लेकर मां दुर्गा की आराधना करता है. जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत खिलार पंचायत के नवाबांध-पवना गांव में मां दुर्गा संतान प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध हैं.

जमुई. सनातन परंपरा में शक्ति की आराधना उनके अलग-अलग रूपों में की जाती है. कोई मां की आराधना धन्य धान्य की प्राप्ति के लिए करता है, तो कोई शक्ति, रक्षा व यश की प्राप्ति को लेकर मां दुर्गा की आराधना करता है. जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत खिलार पंचायत के नवाबांध-पवना गांव में मां दुर्गा संतान प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध हैं. लोगों का कहना है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से माता के दरबार मन्नत मांगने आते हैं, मां दुर्गा उसकी मनोकामना पूर्ण करती हैं. खास करके सुनी गोद लेकर आयी महिलाएं की गोद मां अवश्य भरती हैं.

सन् 1998 में की गयी मां दुर्गा मंदिर की स्थापना

इस मंदिर की स्थापना तात्कालिक मुखिया पवना गांव निवासी रामशरण गुप्ता ने ग्रामीणों के सहयोग से करायी थी. उसके बाद पूजन कार्य की देखरेख उनके दोनों पुत्र संजय गुप्ता व श्याम सुंदर गुप्ता करते हैं. दोनो भाइयों ने बताया कि दस दिनों तक चलने वाली इस पूजा में सारी व्यवस्था ग्रामीणों के सहयोग से की जाती है.

तीन दिवसीय मेला का होता है आयोजन

यहां महाअष्टमी से लेकर विजया दशमी तक तीन दिवसीय ग्रामीण मेला लगता है जिसमें बच्चों के मनोरंजन के लिए कई प्रकार की दुकानें लगती हैं. यहा के मेला में बांस से बने समान की बिक्री अधिक होती है.

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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