आनंदपुर विद्यालय को टैग करने के विवाद में फंसे स्कूली बच्चे, 'लेटर-लेटर' के खेल से त्रस्त होकर लगाई DM से गुहार

शिक्षा विभाग के 'लेटर-लेटर' खेल में जमुई के स्कूली बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है. एक स्कूल की जगह बदलने के आदेशों से परेशान छात्रों ने सीधा DM ऑफिस पहुंचकर गुहार लगाई है.

"कभी कहते हैं बसमता स्कूल जाओ, फिर कहते हैं आनंदपुर जाओ, और जब आनंदपुर जाते हैं तो शिक्षक नहीं आते." यह दर्द उन मासूम स्कूली बच्चों का है, जिनका भविष्य शिक्षा विभाग के 'लेटर-लेटर' (आदेश पत्रों) के खेल में अधर में लटक गया है. मामला जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत उच्च माध्यमिक विद्यालय आनंदपुर का है. पिछले 10 दिनों से पढ़ाई ठप होने से परेशान दर्जनों स्कूली बच्चे गुरुवार दोपहर सीधे जिला समाहरणालय (DM ऑफिस) पहुंच गए और जिलाधिकारी से गुहार लगाने की मांग पर अड़ गए.

क्या है पूरा विवाद?

लक्ष्मीपुर प्रखंड के आनंदपुर पंचायत स्थित 'उच्च माध्यमिक विद्यालय आनंदपुर' का संचालन मूल रूप से बसमता गांव के मध्य विद्यालय भवन में किया जा रहा था. सारा विवाद तब शुरू हुआ जब शिक्षा विभाग ने स्कूल की जगह बदलने को लेकर आनन-फानन में दो अलग-अलग पत्र जारी कर दिए:

  • 27 जुलाई का पहला आदेश: जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) धनंजय कुमार पासवान ने पत्रांक 272 जारी कर आदेश दिया कि अब विद्यालय का संचालन आनंदपुर गांव में ही नव-निर्मित भवन में होगा. पत्र में दावा किया गया कि ग्रामीणों के अनुरोध पर जांच की गई है और भवन का 80% काम पूरा हो चुका है.
  • 3 अगस्त का दूसरा आदेश: महज एक सप्ताह बाद, 3 अगस्त को DEO कार्यालय ने पत्रांक 1439 जारी कर अपना ही आदेश पलट दिया. इसमें कहा गया कि आनंदपुर स्कूल की जमीन पर 'टाइटल सूट' (जमीनी विवाद) चल रहा है. इसलिए भवन निर्माण पूरा होने तक बच्चे वापस बसमता गांव के स्कूल में ही पढ़ेंगे.

असमंजस में फंसे बच्चे, बोले- "हम जाएं तो जाएं कहां?"

इस भ्रम की स्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है. समाहरणालय पहुंचे बच्चों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा:

बच्चों का दर्द: "हम जब आनंदपुर स्कूल पहुंचे तो वहां कोई शिक्षक ही नहीं आया. घरवालों के दबाव में हम पूरे दिन स्कूल में खाली बैठे रहते हैं. अब कहा जा रहा है कि फिर से बसमता जाओ. 6 महीने बाद हमारी परीक्षा है, ऐसे में हम अपनी पढ़ाई कैसे पूरी करें? जमुई में बैठे अधिकारी केवल आदेश जारी कर रहे हैं, कोई आनंदपुर जांच करने नहीं आता."

शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही आई सामने

इस पूरे घटनाक्रम ने जमुई शिक्षा विभाग की कार्यशैली और बिना जांच के फैसले लेने की पोल खोलकर रख दी है:

  1. बिना जांच आदेश: सवाल उठ रहा है कि यदि जमीन पर विवाद था, तो 27 जुलाई को पहला आदेश जारी करने से पहले विभाग ने इसकी जांच क्यों नहीं की?
  2. जमीन विवाद पर स्कूल निर्माण कैसे? 3 अगस्त के पत्र में स्पष्ट है कि आनंदपुर निवासी बबीता सिन्हा ने अपनी निजी जमीन (खाता 119, खसरा 3559, 3570, 3571) पर जबरन भवन बनाने और टाइटल सूट चलने की शिकायत की है. ऐसे में सवाल यह भी है कि विवादित जमीन पर 80% स्कूल भवन का निर्माण कैसे करा दिया गया?

विभाग ने अब मामले की जांच के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा), तकनीकी उप प्रबंधक (BSEIDC) और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (लक्ष्मीपुर) की एक कमेटी गठित कर दी है. वहीं, ग्रामीण इस भारी लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.


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लेखक के बारे में

By गुलशन कश्यप

गुलशन कश्यप प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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