जमुई:
जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में शनिवार को जिला जल एवं स्वच्छता समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिले में संचालित कचरा प्रबंधन कार्यों की समीक्षा की गई. साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2026 एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया.स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु अभियान की उपलब्धियों की हुई समीक्षा
बैठक में हाल ही में संपन्न ‘स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु अभियान’ की उपलब्धियों पर चर्चा की गई. अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान ग्रामीणों को मिशन लाइफ, ओडीएफ प्लस मॉडल गांव, कचरा प्रबंधन के 4आर तथा धूसर जल प्रबंधन के 3आर सिद्धांतों के प्रति जागरूक किया गया.
चार स्तरीय कचरा पृथक्कीकरण होगा अनिवार्य
डीएम ने कहा कि नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत प्रत्येक घर और प्रतिष्ठान को गीला, सूखा, सैनिटरी एवं घरेलू हानिकारक कचरे को अलग-अलग कर संग्रहकर्ता को देना होगा. चार स्तरीय कचरा पृथक्कीकरण व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा. नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी. बैठक में महादलित टोलों के शौचालयविहीन परिवारों को जीविका के माध्यम से ब्याजमुक्त राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया. जियो-टैगिंग के बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से इस राशि का समायोजन किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण को बढ़ावा मिलेगा.
स्वच्छता कर्मियों के मानदेय भुगतान और प्रशिक्षण पर जोर
स्वच्छता कर्मियों के लंबित मानदेय भुगतान के लिए राशि हस्तांतरण की स्वीकृति दी गई. साथ ही पंचायतों में उपलब्ध संसाधनों के संचालन एवं रखरखाव के लिए प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की गई. जिला एवं प्रखंड स्तर पर कार्यशालाओं के आयोजन तथा जनप्रतिनिधियों एवं कर्मियों को नए नियमों का प्रशिक्षण देने की रूपरेखा भी तैयार की गई. बैठक के दौरान कुछ पंचायतों द्वारा 15वीं वित्त आयोग की टाइड ग्रांट राशि उपलब्ध नहीं कराने पर डीएम ने नाराजगी जताई और संबंधित पंचायतों को शीघ्र राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.
खुले में कचरा जलाने या फेंकने पर लगेगा स्पॉट फाइन
डीएम ने स्पष्ट किया कि अब खुले में कचरा जलाने, मिट्टी में गाड़ने अथवा तालाब, नदी और अन्य जल निकायों में कचरा फेंकने पर मौके पर ही स्पॉट फाइन लगाया जाएगा. बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी वसूली जाएगी. बैठक में ‘प्रदूषक भुगतान करे’ सिद्धांत के तहत स्वच्छता शुल्क की अनिवार्य वसूली तथा वार्ड सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने पर भी सहमति बनी. वहीं बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराने एवं अपने परिसर में ही गीले कचरे का प्रसंस्करण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. बैठक के अंत में जिला पदाधिकारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण ‘मिशन लाइफ’ का मूल आधार है. उन्होंने जिलेवासियों से स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन बनाने तथा कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करने की अपील की.
