वाह रे नगर पंचायत सिकंदरा! सफाई एजेंसी को भुगतान कर भूला कार्यालय, पार्षदों ने लगाया 20 लाख के गबन का आरोप

जमुई जिले के सिकंदरा नगर पंचायत से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां सफाई एजेंसी को लाखों के भुगतान का हिसाब नहीं मिल रहा है. पार्षदों ने लाखों के गबन का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है.

जमुई जिले के नगर पंचायत सिकंदरा में प्रशासनिक पारदर्शिता और सरकारी खजाने के रखरखाव को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां नगर पंचायत कार्यालय ने सफाई एजेंसी को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन जब हिसाब मांगा गया तो अधिकारी ने लिखित जवाब दिया कि "कार्यालय को नहीं पता कि कितना भुगतान हुआ है." इस अजीबो-गरीब मामले के सामने आने के बाद वार्ड पार्षदों में भारी आक्रोश है और उन्होंने स्वच्छता पदाधिकारी पर मिलीभगत कर करीब 20 लाख रुपये के गबन का गंभीर आरोप लगाया है.

क्या है पूरा मामला?

नगर पंचायत सिकंदरा में सफाई व्यवस्था को लेकर हुए भुगतान से यह पूरा विवाद जुड़ा हुआ है:

  • एजेंसी को मिला काम: 16 मार्च 2026 से नगर पंचायत में सफाई की जिम्मेदारी कल्पतरु कंस्ट्रक्शन को सौंपी गई थी.
  • ईओ की गिरफ्तारी के बाद रुका था भुगतान: 28 अप्रैल को तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी (EO) संतोष कुमार को निगरानी विभाग (Vigilance) की टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद से भुगतान अटका हुआ था.
  • जुलाई में हुआ भुगतान: नए कार्यपालक पदाधिकारी के योगदान के बाद जुलाई माह में एजेंसी को 16 मार्च से 30 अप्रैल तक (डेढ़ महीने) का बकाया भुगतान कर दिया गया.

"कार्यालय को नहीं पता कितना दिया पैसा"- स्वच्छता पदाधिकारी का जवाब

जब सशक्त स्थायी समिति के सदस्य गोपाल कुमार ने पत्र लिखकर सफाई एजेंसी को दिए गए भुगतान का ब्यौरा मांगा, तो पूरा मामला उजागर हुआ:

अधिकारी का अजब-गजब जवाब: स्वच्छता पदाधिकारी सह प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी रौशनी कुमारी ने लिखित रूप से जवाब दिया कि "एजेंसी को कितना भुगतान हुआ है, इसकी जानकारी कार्यालय को नहीं है."

इतना ही नहीं, इसके बाद स्वच्छता पदाधिकारी ने उसी सफाई एजेंसी को पत्र भेजकर पूछा कि उन्हें कितना भुगतान प्राप्त हुआ है और उन्होंने मजदूरों को कितना पैसा बांटा है. यानी जिसे हिसाब रखना था, वही अब एजेंसी से हिसाब मांग रहा है.

32 लाख में 20 लाख के गबन का आरोप, DM और EOU से होगी शिकायत

मामले को लेकर नगर पंचायत के वार्ड पार्षदों में जबरदस्त गुस्सा व्याप्त है:

  • खर्च हुआ दोगुना: पार्षदों का कहना है कि पहले सफाई पर प्रति माह ₹8 से ₹10 लाख का खर्च आता था, लेकिन नई एजेंसी के आते ही यह खर्च दोगुने से भी अधिक हो गया.
  • गबन का आरोप: पार्षदों के अनुसार, महज डेढ़ महीने की सफाई के लिए एजेंसी को ₹32 लाख से ज्यादा का भुगतान किया गया, जिसमें स्वच्छता पदाधिकारी और कार्यालय लिपिक की मिलीभगत से लगभग ₹20 लाख रुपये की हेराफेरी (गबन) की गई है.
  • जांच की मांग: वार्ड पार्षद गोपाल कुमार ने चेतावनी दी है कि इस बड़े वित्तीय घोटाले की लिखित शिकायत जिलाधिकारी (DM) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से की जाएगी.

(नोट: पूरे मामले पर प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी सह स्वच्छता पदाधिकारी रौशनी कुमारी का पक्ष जानने के लिए उनके फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.)


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