रसोई में ताला, चूल्हा ठंडा और बच्चों की थाली खाली; बरहट के स्कूल में चावल खत्म होने से मिड-डे मील बंद

बरहट के प्राथमिक विद्यालय यादव टोला में चावल की किल्लत के चलते बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिला. सरकारी व्यवस्था के दावों पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि बच्चों को भूखे पेट ही घर लौटना पड़ा. इस घटना ने मिड-डे मील योजना की जमीनी हकीकत को उजागर किया है.

Barhat School Mid Day Meal: बरहट के स्कूल की घंटी बजी, बच्चे पहुंचे और पढ़ाई भी हुई, लेकिन लंच के समय उनकी नजरें उस थाली पर टिक गयीं, जिसमें हर दिन गर्म खाना मिलता है. गुरुवार को प्राथमिक विद्यालय यादव टोला गुगुलडीह में बच्चों को यह थाली नहीं मिली. वजह थी स्कूल में चावल का खत्म हो जाना.

मध्यान भोजन नहीं बनने के कारण विद्यालय के रसोईघर में ताला लटका रहा और चूल्हा ठंडा पड़ा रहा. भोजन का इंतजार कर रहे बच्चों को आखिरकार बिना खाना खाये ही घर लौटना पड़ा. इस पूरे घटनाक्रम ने स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्यान भोजन की व्यवस्था और उसकी निगरानी पर सवाल खड़े कर दिये हैं.

120 बच्चे नामांकित, लंच के समय सिर्फ 8-10 नजर आये

विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक कुल 120 बच्चे नामांकित हैं. लेकिन गुरुवार को मध्यान भोजन के समय विद्यालय परिसर में केवल आठ से दस बच्चे ही दिखाई दिये.

नामांकन के मुकाबले बच्चों की यह बेहद कम उपस्थिति अपने आप में सवाल खड़ा करती है. भोजन नहीं बनने का असर बच्चों की उपस्थिति पर कितना पड़ा, यह अलग जांच का विषय है, लेकिन मौके पर मौजूद तस्वीर ने व्यवस्था की स्थिति जरूर सामने ला दी.

जिन बच्चों को स्कूल में पढ़ाई के साथ पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए था, वे भोजन की व्यवस्था नहीं होने के कारण घर लौट गये.

रसोईघर में ताला, चूल्हा रहा ठंडा

गुरुवार को विद्यालय के रसोईघर में ताला लटका हुआ था. चूल्हे पर खाना बनने के कोई संकेत नहीं थे.

मध्यान भोजन योजना का उद्देश्य ही यह है कि स्कूल आने वाले बच्चों को नियमित रूप से गर्म और पौष्टिक भोजन मिले. खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए स्कूल का भोजन पढ़ाई के साथ उनकी रोजमर्रा की जरूरत का भी हिस्सा है.

लेकिन यहां चावल खत्म होते ही भोजन व्यवस्था पूरी तरह रुक गयी.

‘चावल कम था तो पहले इंतजाम क्यों नहीं हुआ?’

स्थानीय लोगों ने मध्यान भोजन व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल उठाये हैं. उनका कहना है कि यदि स्कूल में चावल का स्टॉक कम हो रहा था तो समय रहते आवंटन की मांग की जानी चाहिए थी.

लोगों का सवाल है कि क्या चावल खत्म होने की जानकारी अचानक हुई? यदि पहले से पता था कि स्टॉक खत्म होने वाला है तो नया आवंटन आने तक बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गयी?

इन सवालों का जवाब व्यवस्था से मिलना बाकी है.

बच्चों ने कहा- खाना नहीं बना, घर जाकर खाया

विद्यालय की छात्राओं अंजली कुमारी, निशा भारती और कविता कुमारी ने बताया कि गुरुवार को स्कूल में खाना नहीं बना.

छात्राओं के अनुसार, सामान्य दिनों में उन्हें स्कूल में चावल और सब्जी मिलती है. लेकिन गुरुवार को भोजन नहीं मिला, इसलिए उन्हें घर जाकर खाना पड़ा.

बच्चों के लिए मध्यान भोजन केवल सरकारी योजना का नाम नहीं है. स्कूल में मिलने वाला खाना उनके रोज के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ऐसे में भोजन नहीं मिलने पर उन्हें दोपहर में घर लौटना पड़ा.

प्रधान शिक्षक छुट्टी पर, शिक्षिका के पास था प्रभार

विद्यालय के प्रधान शिक्षक अविनाश कुमार ने बताया कि वह छुट्टी पर हैं और विद्यालय का प्रभार एक शिक्षिका को सौंपा गया है.

उन्होंने स्वीकार किया कि विद्यालय में मध्यान भोजन के लिए चावल खत्म हो गया है. इसी वजह से गुरुवार को खाना नहीं बन सका.

प्रधान शिक्षक ने कहा कि वह अपने घर से खाना नहीं बनवा सकते. उनका कहना है कि चावल का आवंटन मिलने के बाद ही मध्यान भोजन दोबारा बनाया जा सकेगा.

पदाधिकारी ने कहा- जल्द पहुंचाया जाएगा चावल

इस मामले में प्रखंड साधनसेवी मध्यान भोजन योजना राजीव मिश्रा ने बताया कि विद्यालय के लिए चावल का आवंटन जल्द पहुंचा दिया जाएगा.

अब सवाल यह है कि आवंटन वास्तव में विद्यालय तक कब पहुंचेगा और बच्चों को फिर से नियमित रूप से गर्म भोजन कब मिलना शुरू होगा.

Barhat School Mid Day Meal: बच्चों की थाली में भोजन पहुंचाना ही व्यवस्था की असली परीक्षा

मध्यान भोजन जैसी योजना का महत्व केवल सरकारी कागजों में दर्ज आंकड़ों से नहीं, बल्कि स्कूल में बच्चों की थाली तक पहुंचने वाले निवाले से तय होता है.

यादव टोला गुगुलडीह विद्यालय की घटना ने यही सवाल सामने रखा है कि खाद्यान्न का स्टॉक खत्म होने से पहले निगरानी की व्यवस्था कितनी सक्रिय है. अगर किसी विद्यालय में चावल खत्म हो जाता है और उसी दिन बच्चों का भोजन बंद हो जाता है, तो खाद्यान्न आपूर्ति और स्कूल स्तर पर निगरानी के बीच समन्वय पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

फिलहाल पदाधिकारी ने जल्द चावल उपलब्ध कराने की बात कही है. अब देखना होगा कि आवंटन कितनी जल्दी पहुंचता है और बच्चों की थाली में फिर से गर्म भोजन कब लौटता है.

फोटो चावल के अभाव में बंद पड़ा रसोईया घर, और लंच के समय स्कूल मौजूद महज 8-10 बच्चे। | Prabhat Khabar Network

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लेखक के बारे में

By पंकज कुमार सिंह

पंकज कुमार सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के जमुई कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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