'रिवर मैन ऑफ जमुई': 25 साल पहले आई बाढ़ ने बदली जिंदगी, अब जमुई की 32 नदियों को बचाने के लिए समर्पित हैं नंदलाल सिंह

River Man Nandlal Singh: जमुई के नंदलाल सिंह, जिन्हें 'रिवर मैन' के नाम से जाना जाता है, 25 साल पहले आई बाढ़ की तबाही से प्रेरित होकर नदियों के संरक्षण में अपना जीवन समर्पित कर चुके हैं. गांव-गांव जनजागरण और नदी बचाओ आंदोलनों के जरिए वे जिले की 32 नदियों के अस्तित्व को बचाने में जुटे हैं.

River Man Nandlal Singh: प्राकृतिक आपदाएं अक्सर इंसानी जिंदगी को झकझोर कर रख देती हैं, लेकिन कुछ विरले लोग ऐसे होते हैं जो आपदा के दर्द को ही अपने जीवन का परम उद्देश्य बना लेते हैं. जमुई जिले के नंदलाल सिंह एक ऐसा ही मिसाल हैं. लगभग 25 वर्ष पूर्व आई एक भीषण बाढ़ की तबाही और लोगों की बेबसी को देखकर उन्होंने अपना पूरा जीवन नदियों के संरक्षण और जीर्णोद्धार के नाम कर दिया. जल यात्राओं, गांव-गांव जनजागरण और नदी बचाओ आंदोलनों के जरिए वे बीते ढाई दशकों से जिले की नदियों के अस्तित्व को बचाने में जुटे हैं. यही वजह है कि आज पूरा क्षेत्र उन्हें "रिवर मैन ऑफ जमुई" के नाम से जानता है.

25 साल पुरानी बाढ़ की त्रासदी से शुरू हुआ अभियान

नंदलाल सिंह बताते हैं कि 2000 के दशक की शुरुआत में आई बाढ़ ने उन्हें यह गहराई से अहसास कराया कि यदि नदियों के प्राकृतिक बहाव और स्वरूप से खिलवाड़ जारी रहा तो इसका सबसे भयंकर खामियाजा मानव सभ्यता को ही भुगतना पड़ेगा:

  • वर्ष 2002 से संगठित प्रयास: इस त्रासदी से सबक लेते हुए उन्होंने 2002 में संगठित रूप से 'नदी संरक्षण अभियान' की नींव रखी.
  • जमुई की 32 नदियों की चिंता: वे बताते हैं कि जमुई जिले में करीब 32 छोटी-बड़ी नदियां हैं. कभी इनमें साल भर जलधारा बहती थी, लेकिन आज स्थिति यह है कि मानसून के दौरान भी कई नदियां सूखी नजर आती हैं. यह गिरते भूजल स्तर और भावी जल संकट का स्पष्ट संकेत है.

"नदियों को बचाना केवल पर्यावरण नहीं, मानव अस्तित्व की लड़ाई"

जल संकट के गंभीर परिणामों पर प्रकाश डालते हुए नंदलाल सिंह कहते हैं:

बदलती जीवनशैली और जल संकट: "एक समय था जब लोग सीधे नदी का जल पीते थे. फिर कुएं, चापाकल और अब गहरी बोरिंग के सहारे जीवन चल रहा है. अगर नदियों का अस्तित्व समाप्त हुआ तो भूजल स्तर पूरी तरह रसातल में चला जाएगा. ऐसे में आने वाली पीढ़ियों के लिए पीने के पानी का विकराल संकट पैदा हो जाएगा."

उन्होंने नमामि गंगे अभियान के प्रमुख पद्मश्री अनिल प्रकाश जोशी, भारतीय नदी परिषद के 'नदी पुरुष' रमणकांत और 'जल पुरुष' डॉ. राजेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में इस मुहिम को आगे बढ़ाया है.

एक दर्जन से अधिक राष्ट्रीय सम्मान, लेकिन लक्ष्य अब भी नदियों को पुनर्जीवित करना

नदी संरक्षण के प्रति उनके असाधारण समर्पण के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी भरपूर सराहना और सम्मान मिला है:

  • जल प्रहरी सम्मान: केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा उन्हें पूर्व में 'जल प्रहरी सम्मान' से नवाजा जा चुका है.
  • राष्ट्रीय नदी मंथन 2024 (नागपुर): भारतीय नदी परिषद द्वारा नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर सहित कई गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति में उन्हें सम्मानित किया गया.

River Man Nandlal Singh: पत्नी के निधन और पारिवारिक संघर्षों के बावजूद नहीं डगमगाया संकल्प

नंदलाल सिंह की यह यात्रा कांटों भरी रही है. शुरुआत में जब बच्चे छोटे थे और घर की आर्थिक स्थिति पैतृक खेती पर निर्भर थी, तब उनकी पत्नी ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाली और उन्हें अभियान के लिए प्रेरित किया.

  • 2014 का व्यक्तिगत आघात: वर्ष 2014 में उनकी पत्नी का निधन हो गया, जो उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था.
  • जारी रहा मिशन: अकेले परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी आ जाने के बावजूद उन्होंने अपने संकल्प को टूटने नहीं दिया. उनका मानना है कि व्यक्तिगत दुखों से परे यदि प्रकृति और नदियां बची रहेंगी, तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह पाएगा.

बिना किसी बड़े सरकारी संसाधन या पद के, जमुई के 'रिवर मैन' नंदलाल सिंह आज भी एक नई सुबह की उम्मीद में नदियों को बचाने की लड़ाई निस्वार्थ भाव से लड़ रहे हैं.


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लेखक के बारे में

By गुलशन कश्यप

गुलशन कश्यप प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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