बरहट. आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर अंकुश लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने बीते 7 जनवरी 2025 को देशभर के सभी सरकारी स्कूलों व शैक्षणिक संस्थानों में भटकते कुत्तों के प्रवेश पर सख्त रोक लगाने का आदेश जारी किया था. इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने पत्रांक संख्या 1584 में ने साफ निर्देश दिये थे कि जिन विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है, वहां तत्काल चहारदीवारी निर्माण कराया जाये, मुख्य द्वार पर गेट लगाया जाये, नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड लगाया जाये और पूरे मामले की निगरानी के लिए नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति की जाये, लेकिन बरहट प्रखंड में यह आदेश फाइलों से बाहर निकल ही नहीं पाया, जबकि बरहट में प्राथमिक विद्यालय 39 उत्क्रमित मध्य विधालय 47 तथा 11 हाई स्कूल संचालित हो रहें हैं. हाई स्कूलों को छोड़ कर प्राथमिक और उत्क्रमित विद्यालयों के कई स्कूलों में न गेट है, न चहारदीवारी पूरी है और न ही किसी नोडल पदाधिकारी का नाम तय हुआ है. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की यह खुली अवहेलना जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही को उजागर करती है.
दर्जनों स्कूल असुरक्षित, जिम्मेदार चैन की नींद में
विभाग का साफ निर्देश था कि पंचायत या गांव स्तर पर यदि आवारा कुत्ते भटकते पाये जायें तो नगर निगम या नगर पंचायत द्वारा उन्हें तुरंत पकड़कर निर्धारित आश्रय गृह में भेजा जाये और उनका टीकाकरण कराया जाये. साथ ही विद्यार्थियों और स्कूल कर्मियों को पशुओं के सुरक्षित व्यवहार, कुत्ते के काटने पर प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण देने, जागरूकता अभियान चलाने और शनिवार के बाल प्रशिक्षण कार्यक्रम में इसे शामिल करने के निर्देश भी दिये गये थे. हकीकत यह है कि न आश्रय गृह दिख रहे हैं, न टीकाकरण और न ही जागरूकता की कोई ठोस पहल. अब ग्रामीण कह रहे हैं कि यदि किसी स्कूल में आवारा कुत्ते के हमले से कोई बच्चा घायल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा.
मध्याह्न भोजन के बाद विशेष साफ-सफाई करने का आदेश
शिक्षा विभाग ने अपने पत्र में शिक्षकों को निर्देश दिया था कि मध्याह्न भोजन के समय स्कूल परिसर में विशेष सफाई रखी जाये. रसोईघर के बर्तन ढककर रखें जायें और भोजन के बाद पूरे परिसर की सफाई अनिवार्य हो, ताकि भोजन की गंध से आवारा कुत्ते विद्यालय में प्रवेश न कर सकें, परंतु बरहट के कई विद्यालयों में ये निर्देश भी कागजों तक ही सीमित हैं. नतीजा यह कि स्कूल परिसर आवारा कुत्तों के लिए खुला मैदान बने हुए हैं.कहीं चहारदीवारी गायब, कहीं गेट का नामोनिशान नहीं
प्रखंड अंतर्गत संचालित राजकीय बुनियादी विद्यालय बिचला टोला कटौना और प्राथमिक विद्यालय जावातरी, उत्क्रमित मध्य विद्यालय कूसौना आज भी बिना चहारदीवारी के संचालित हो रहे हैं. वहीं राजकीय बुनियादी विद्यालय नुमर, नवसृजित विद्यालय ललमटिया, प्राथमिक विद्यालय रावत टोला कटौना , प्राथमिक विद्यालय मकतब केवाल, उत्क्रमित मध्य फुलवरिया में चहारदीवारी का निर्माण अधूरा पड़ा है और मुख्य द्वार पर गेट तक नहीं लगाया गया है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है, जबकि इन स्कूलों के आसपास आवारा कुत्ते देखे जाते हैं.कहते हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी दयाशंकर ने बताया कि जिन विद्यालयों में चहारदीवारी का निर्माण अधूरा है उसे शीघ्र पूर्ण कराया जायेगा. साथ ही सभी विद्यालयों के मुख्य द्वार पर गेट लगाए जायेंगे. उन्होंने बताया कि इस कार्य की निगरानी व जिम्मेदारी नोडल पदाधिकारी के रूप में जिला पदाधिकारी को सौंपी गयी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
