झाझा. थाना क्षेत्र के हथिया पंचायत अंतर्गत तेतरियाटांड़ गांव में सर्पदंश की चपेट में आने से एक मजदूर की मौत हो गयी. मृतक की पहचान ब्रह्मदेव मांझी के रूप में हुई है. घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
जमीन पर सो रहे मजदूर के सिर में विषधर ने डंसा
परिजनों ने बताया कि ब्रह्मदेव मांझी रात में खाना खाने के बाद घर में जमीन पर दरी बिछाकर सो गए थे. रात करीब 1.30 बजे अचानक उनकी नींद खुली और वे चिल्लाने लगे. परिजनों ने देखा कि किसी विषधर सांप ने उनके सिर में डंस लिया है. सर्पदंश के बाद परिजन काफी देर तक घर पर ही विभिन्न उपाय करते रहे. इस दौरान इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने में देरी हो गयी. जब ब्रह्मदेव मांझी की तबीयत अधिक बिगड़ने लगी तो परिजन उन्हें लेकर झाझा रेफरल अस्पताल पहुंचे.
रेफरल अस्पताल से सदर अस्पताल किया गया रेफर
रेफरल अस्पताल में चिकित्सकों ने उनका प्राथमिक उपचार किया. हालांकि उनकी स्थिति लगातार गंभीर बनी रही. चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें सदर अस्पताल रेफर कर दिया. परिजन उन्हें सदर अस्पताल लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी. मजदूर की मौत के बाद पूरे परिवार में मातम छा गया.
गरीब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक ब्रह्मदेव मांझी अत्यंत गरीब परिवार से थे और ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे. उनके परिवार में दो पुत्र और चार पुत्रियां हैं. इनमें दो पुत्रियों की शादी हो चुकी है. कमाने वाले व्यक्ति की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है.
जिला परिषद प्रतिनिधि पहुंचे घर, प्रशासन से मुआवजे की मांग
घटना की सूचना मिलने पर जिला परिषद प्रतिनिधि राकेश कुमार सिंह मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को ढांढ़स बंधाया. उन्होंने परिजनों से शव का अंत्य परीक्षण कराने की बात भी कही, लेकिन परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि मृतक अत्यंत गरीब परिवार से था और मजदूरी कर जीवन-यापन करता था. उन्होंने प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि परिवार को कुछ राहत मिल सके.
सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें
सर्पदंश की स्थिति में घरेलू उपाय या झाड़-फूंक के बजाय मरीज को बिना देरी नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए. मरीज को शांत रखें और प्रभावित अंग को अनावश्यक रूप से हिलने-डुलने न दें. समय पर चिकित्सकीय उपचार मिलने से कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है.
