जमुई शहर के बीचों-बीच स्थित करीब आठ दशक पुराना ऐतिहासिक 'पुराना मंडल कारा' अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है. पोकलेन और बुलडोजर की मदद से इस पुरानी इमारत को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. 80 से अधिक वर्षों तक शहर की पहचान और मुख्य लैंडमार्क रहा यह विशाल परिसर अब पूरी तरह समतल होकर नया रूप लेने जा रहा है.
महापुरुषों के नाम पर दर्ज थीं जेल की बैरकें
पुराना मंडल कारा केवल एक प्रशासनिक ढांचा नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय नायकों की स्मृतियों को समेटे हुए था. जेल परिसर के महिला वार्ड सहित आधा दर्जन से अधिक बड़े वार्डों का नाम देश के महान राष्ट्रनायकों जैसे महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद और रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर रखा गया था. प्रत्येक वार्ड के मुख्य द्वार पर अंकित ये नाम बंदियों के भीतर नैतिक चेतना का संचार करते थे.
बुजुर्गों के लिए भावुक पल, शहर का बदल रहा स्वरूप
जमुई के वरिष्ठ नागरिकों और पुराने निवासियों के लिए इस इमारत का ढहना बेहद भावुक करने वाला पल रहा. स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि यह इमारत सिर्फ ईंट और गारे का ढांचा नहीं, बल्कि जमुई के 80 साल के लंबे इतिहास की खामोश गवाह थी. वर्षों तक लोग आसपास का पता बताने के लिए इसी ऐतिहासिक इमारत को मुख्य संदर्भ के रूप में इस्तेमाल करते थे.
मनियड्डा में शिफ्ट हुआ नया जेल, अब आकार लेगा 'न्यायिक परिसर'
सुरक्षा कारणों और शहर में बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए मंडल कारा को पहले ही टाउन थाना क्षेत्र के मनियड्डा स्थित आधुनिक और उच्च सुरक्षा मानकों वाले नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था. पुराना परिसर खाली होने के बाद अब इस विशाल भूखंड का पुनर्विकास किया जा रहा है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पुराने ढांचे को ध्वस्त करने के बाद इस जमीन पर न्यायिक अधिकारियों के लिए अत्याधुनिक आवासीय क्वार्टरों का निर्माण कराया जाएगा, जिससे न्यायपालिका का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा.
