जमुई में मवेशी घर लाने के दौरान वज्रपात की चपेट में आए महेंद्र, छह बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

Jamui lightning death: जानकारी के अनुसार महेंद्र यादव रोज की तरह अपने मवेशियों को चराने के लिए बहियार गए थे. इसी दौरान मौसम अचानक बदल गया और तेज गर्जना के साथ बारिश शुरू हो गई. बारिश से बचने और मवेशियों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए वह वापस लौट रहे थे. तभी अचानक आसमान से गिरी बिजली उनकी चपेट में आ गई. वज्रपात इतना तेज था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

जमुई से अर्जुन अरनव की रिपोर्ट:

Jamui lightning death: जिले में हुई बारिश जहां लोगों के लिए राहत लेकर आई, वहीं सिकंदरा थाना क्षेत्र के कोनन गांव में यही बारिश एक परिवार के लिए जिंदगीभर का दर्द बन गई. वज्रपात की चपेट में आने से 47 वर्षीय महेंद्र यादव की मौत हो गई. हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

जानकारी के अनुसार महेंद्र यादव रोज की तरह अपने मवेशियों को चराने के लिए बहियार गए थे. इसी दौरान मौसम अचानक बदल गया और तेज गर्जना के साथ बारिश शुरू हो गई. बारिश से बचने और मवेशियों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए वह वापस लौट रहे थे. तभी अचानक आसमान से गिरी बिजली उनकी चपेट में आ गई. वज्रपात इतना तेज था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. सूचना मिलने पर परिजन भी मौके पर पहुंचे. परिवार के सदस्यों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया.

छह बच्चों के भविष्य पर छाया संकट

मृतक महेंद्र यादव अपने पीछे पांच बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं. परिवार की आजीविका का मुख्य आधार वही थे. उनकी असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परिवार के भरण-पोषण को लेकर परिजनों की चिंता बढ़ गई है.

ग्रामीणों ने बताया कि महेंद्र यादव मेहनतकश, सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्ति थे. उनकी मौत से न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव को गहरा सदमा पहुंचा है. हादसे के बाद गांव में शोक का माहौल है.

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

घटना की जानकारी मिलने के बाद सिकंदरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की. इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जमुई सदर अस्पताल भेजा गया. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया.

आपदा राहत के तहत मुआवजे की मांग

हादसे के बाद ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मृतक के आश्रितों को आपदा राहत योजना के तहत शीघ्र मुआवजा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और ऐसे समय में सरकारी सहायता ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा साबित होगी.

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Published by: Shruti Kumari

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