Jamui Artist Mahi Barnwal: जमुई के सोनो प्रखंड के बटिया गांव की स्नातक प्रथम वर्ष की छात्रा माही बरनवाल बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के केवल स्केच पेन से जीवंत कलाकृतियां तैयार कर रही हैं. इंस्टाग्राम पर उनकी पेंटिंग तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं और अब उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों से आर्टवर्क के ऑर्डर मिलने लगे हैं.
जमुई. प्रतिभा को पहचान दिलाने के लिए हमेशा बड़े शहर, महंगे संसाधन या किसी नामी संस्थान की जरूरत नहीं होती. कई बार एक छोटे से गांव से निकली लगन और लगातार अभ्यास ऐसी कहानी लिख देती है, जो हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन जाती है. बिहार के जमुई जिले के सोनो प्रखंड के बटिया गांव की रहने वाली माही बरनवाल ऐसी ही एक युवा कलाकार हैं, जिन्होंने केवल स्केच पेन की मदद से अपनी अलग पहचान बनाई है.
स्नातक प्रथम वर्ष की छात्रा माही ने न किसी आर्ट कॉलेज में पढ़ाई की, न किसी गुरु से चित्रकला सीखी और न ही यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म का सहारा लिया. उन्होंने अपने प्रयोग, धैर्य और लगातार अभ्यास के दम पर ऐसी कलाकृतियां तैयार की हैं, जिन्हें देखकर पहली नजर में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि वे केवल स्केच पेन से बनाई गई हैं.
स्केच पेन से रचती हैं जीवंत पेंटिंग
माही की सबसे बड़ी खासियत उनकी कार्यशैली है. जहां अधिकांश कलाकार वॉटर कलर, एक्रेलिक या अन्य माध्यमों का उपयोग करते हैं, वहीं माही केवल स्केच पेन से रंगों की गहराई, प्रकाश और छाया का ऐसा संतुलन बनाती हैं कि उनकी पेंटिंग जीवंत दिखाई देती हैं.
उनकी कलाकृतियों में चेहरे के भाव, आंखों की चमक, त्वचा की टोन और रंगों का मेल इतना स्वाभाविक होता है कि अनुभवी कलाकार भी उनकी बारीकी और सृजनात्मकता की सराहना करते हैं.
स्कूल की ड्राइंग कॉपी से शुरू हुआ सफर
माही बताती हैं कि चित्रकला के प्रति उनका लगाव बचपन से था. स्कूल के दिनों में उन्होंने ड्राइंग बनानी शुरू की और धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया. उन्होंने किसी तय शैली की नकल करने के बजाय अपनी खुद की तकनीक विकसित की.
लगातार अभ्यास के कारण उनकी कला हर वर्ष बेहतर होती गई. उन्होंने अपनी पेंटिंग इंस्टाग्राम पर साझा करनी शुरू की, जहां लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और बढ़ते व्यूज ने उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा दिया.
Jamui Artist Mahi Barnwal: सोशल मीडिया ने दिलाई नई पहचान
पिछले तीन से चार वर्षों से माही प्रोफेशनल स्तर पर आर्टवर्क तैयार कर रही हैं. अब उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से विभिन्न प्रकार की पेंटिंग और स्केच बनाने के ऑर्डर मिलने लगे हैं. उनकी बनाई कलाकृतियां केवल जमुई या बिहार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों तक पहुंच चुकी हैं.
ग्रामीण परिवेश से निकलकर डिजिटल माध्यमों के जरिए राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना माही की यात्रा को और भी खास बनाता है. यह दिखाता है कि सोशल मीडिया आज प्रतिभाशाली युवाओं के लिए अवसर का बड़ा मंच बन चुका है.
न गुरु, न संस्थान, न यूट्यूब
माही का कहना है कि उन्होंने कभी किसी आर्ट संस्थान में प्रशिक्षण नहीं लिया. उन्होंने अपनी कला को विकसित करने के लिए यूट्यूब या अन्य ऑनलाइन ट्यूटोरियल की भी मदद नहीं ली. उन्होंने केवल स्वयं के प्रयोग, बार-बार अभ्यास और धैर्य के बल पर अपनी शैली तैयार की है.
उनके अनुसार एक विस्तृत आर्टवर्क तैयार करने में लगभग 32 से 34 घंटे का समय लगता है. अब तक वह कई दर्जन से अधिक कलाकृतियां तैयार कर चुकी हैं और हर नई पेंटिंग के साथ कुछ नया सीखने की कोशिश करती हैं.
परिवार का मिला पूरा साथ
माही मानती हैं कि उनके परिवार ने हमेशा उनके जुनून को समझा और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार के सहयोग ने उन्हें निरंतर अभ्यास करने का अवसर दिया.
उनका सपना चित्रकला के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाना है. वह चाहती हैं कि भविष्य में उनकी कलाकृतियां देश के प्रमुख कला मंचों और प्रदर्शनियों तक पहुंचें.
माही बरनवाल की कहानी यह साबित करती है कि यदि मन में सीखने की इच्छा, मेहनत करने का जज्बा और अपने हुनर पर विश्वास हो, तो किसी भी छोटे गांव से निकलकर बड़ी पहचान बनाई जा सकती है.
Also Read: प्रशांत किशोर की जीत के पीछे 3 रणनीतिकार कौन? जिनकी मदद से नितिन नवीन के किले को ढहाया
