जमुई से अर्जुन अरनव की रिपोर्ट: जिले के कटौना बालू घाट क्षेत्र में बालू माफियाओं की मनमानी और दुस्साहस का एक बड़ा मामला सामने आया है. आरोप है कि माफिया अब सरकारी घाटों के साथ-साथ निजी रैयती जमीन को भी निशाना बना रहे हैं और रात के अंधेरे में अवैध रूप से बालू का उठाव कर रहे हैं. इस मामले को लेकर पीड़ित जमीन मालिक ने खनन विभाग से न्याय की गुहार लगाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
कोर्ट में लंबित मामले के बावजूद जबरन खनन
पीड़ित जमीन मालिक योगेन्द्र पंडित ने खनन विभाग के पदाधिकारी को आवेदन देकर बताया कि उनकी खतियानी जमीन (खाता संख्या 85, खेसरा संख्या 334, रकवा 1.20 एकड़) पर माफियाओं की नजर है. उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त जमीन का मामला वर्तमान में दीवानी न्यायालय में लंबित है, इसके बावजूद बालू माफिया नियमों को ताक पर रखकर मशीनों और ट्रैक्टरों के माध्यम से रात भर बालू का उठाव करते हैं. इस अवैध गतिविधि से उनकी निजी जमीन को भारी नुकसान पहुंच रहा है.
प्रशासनिक चुप्पी से माफियाओं के हौसले बुलंद
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कटौना घाट क्षेत्र अवैध बालू कारोबार का गढ़ बन चुका है. सूरज ढलते ही इस इलाके में बालू लदे ट्रैक्टरों और हाइवा की कतारें लग जाती हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण ही माफिया अब निजी संपत्तियों पर कब्जा कर रहे हैं.
कार्रवाई का इंतजार
योगेन्द्र पंडित ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से मांग की है कि उनकी निजी जमीन से हो रहे अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए. अब सबकी नजरें खनन विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वे माफियाओं के इस सिंडिकेट को तोड़ पाते हैं या पीड़ित जमीन मालिक को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी. फिलहाल, इस घटना ने क्षेत्र में तनाव और चर्चा का माहौल बना दिया है.
