जमुई. सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के दावों के बीच जमुई सदर अस्पताल की एक घटना ने मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. बुखार और निमोनिया से पीड़ित 75 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को चिकित्सक ने सीटी स्कैन कराने की सलाह दी थी. जांच के लिए ले जाने के दौरान स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने पर मरीज के बेटे को उन्हें गोद में उठाकर अस्पताल के भीतर ले जाना पड़ा. घटना का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है.
सोनो से इलाज कराने आए थे बुजुर्ग
जानकारी के अनुसार सोनो प्रखंड के चुरहैत क्षेत्र निवासी सदानंद अपने 75 वर्षीय पिता रंजय सिंह को बुखार और निमोनिया की शिकायत के बाद इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे. चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टर ने बुजुर्ग मरीज का सीटी स्कैन कराने की सलाह दी. इसके बाद परिजन उन्हें जांच के लिए ले जाने की तैयारी में जुट गए.
स्ट्रेचर की तलाश में परेशान हुए परिजन
मरीज के बेटे सदानंद के अनुसार सीटी स्कैन सेंटर ले जाने के लिए जब स्ट्रेचर की जरूरत पड़ी तो उन्होंने अस्पताल कर्मियों और अन्य लोगों से जानकारी ली. काफी प्रयास के बावजूद तत्काल स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो सका. उन्होंने बताया कि अस्पताल में मौजूद एक स्ट्रेचर पर पहले से शव रखा हुआ था, जबकि दूसरे स्ट्रेचर की व्यवस्था समय पर नहीं हो सकी.
मजबूरी में पिता को गोद में उठाया
स्ट्रेचर मिलने में हो रही देरी के बीच सदानंद ने अपने 75 वर्षीय पिता को गोद में उठा लिया और अस्पताल के भीतर सीटी स्कैन सेंटर तक ले गए. इसी दौरान किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा. वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे.
स्ट्रेचर जैसी सुविधा की उपलब्धता पर उठे सवाल
मरीज के परिजन का कहना है कि यदि समय पर स्ट्रेचर उपलब्ध हो जाता तो उन्हें अपने बुजुर्ग पिता को गोद में उठाकर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती. खासकर बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जांच केंद्र तक पहुंचाने के लिए स्ट्रेचर जैसी बुनियादी सुविधा समय पर उपलब्ध होना जरूरी है. घटना ने अस्पताल की ट्रॉली व्यवस्था और मरीजों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.
दो ट्रॉली कर्मियों से मांगा गया स्पष्टीकरण
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ थनीश कुमार ने बताया कि स्ट्रेचर से संबंधित मामले की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को मिली है. ड्यूटी पर तैनात दो ट्रॉली कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. उनसे पूछा गया है कि किस परिस्थिति में मरीज को समय पर स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया जा सका.उपाधीक्षक ने बताया कि दोनों कर्मियों का स्पष्टीकरण मिलने के बाद मामले की जांच की जाएगी. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
