Dumri House Collapse: सोनो. लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश ने लखनकियारी पंचायत के डुमरी गांव में दो परिवारों से उनका आशियाना छीन लिया. बुधवार सुबह बारिश के बीच शिवजी कुमार साह और नरेश बरनवाल के पुराने मिट्टी के मकान अचानक भरभराकर गिर गये. देखते ही देखते दोनों घर मलबे में बदल गये. हादसे में परिवार के किसी सदस्य की जान तो बच गयी, लेकिन अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बरसात के इस मौसम में सिर कहां छिपायें.
बारिश का दबाव नहीं झेल सके पुराने मिट्टी के मकान
डुमरी गांव में बुधवार सुबह से ही बारिश हो रही थी. लगातार बारिश के कारण दोनों परिवारों के पुराने कच्चे मकान कमजोर हो गये थे. मिट्टी की दीवारें बारिश का दबाव नहीं झेल सकीं और आखिरकार दोनों मकान पूरी तरह धराशायी हो गये.
मकान गिरने के बाद परिवार के लोगों के सामने अचानक रहने की समस्या खड़ी हो गयी. घर के अंदर रखा सामान भी मलबे में दब गया. बारिश के बीच सामान निकालना और सुरक्षित जगह पर रखना भी उनके लिए बड़ी चुनौती बन गयी है.
गनीमत रही कि मकान गिरने के दौरान परिवार का कोई सदस्य उसकी चपेट में नहीं आया. इस वजह से बड़ा हादसा टल गया. लेकिन घर के मलबे में बदल जाने के बाद दोनों परिवारों की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ गयी हैं.
बारिश ने बढ़ायी गरीब परिवारों की परेशानी
इलाके में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है. इसका सबसे ज्यादा असर कच्चे और जर्जर मकानों पर पड़ रहा है. जिन परिवारों के पास पक्का मकान नहीं है, उनके लिए लगातार बारिश किसी बड़ी आफत से कम नहीं है.
डुमरी में भी कुछ ही पल में दो परिवारों का वर्षों पुराना आशियाना खत्म हो गया. अब रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच दोनों परिवारों के सामने खुले आसमान से बचने की चिंता है. घर के साथ उनका जरूरी सामान भी मलबे में दब गया है, जिससे आर्थिक परेशानी भी बढ़ गयी है.
प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं मिला
पीड़ित दोनों परिवार पहले से ही पक्के मकान की सुविधा से वंचित रहे हैं. बताया गया कि दोनों परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं ले सके. गरीबी रेखा के अंतर्गत पारिवारिक सूची में नाम दर्ज नहीं होने के कारण उन्हें सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया.
ऐसे में प्राकृतिक आपदा ने उनकी पुरानी परेशानी को और गंभीर बना दिया है. जिन परिवारों के पास पहले से ही पक्की छत नहीं थी, अब बारिश के बीच वे पूरी तरह बेघर हो गये हैं.
मलबे के बीच प्रशासन से राहत की उम्मीद
घटना की जानकारी मिलने के बाद मुखिया प्रतिनिधि दिगंबर पांडेय मौके पर पहुंचे और धराशायी हुए दोनों मकानों का निरीक्षण किया. उन्होंने प्रभावित परिवारों की स्थिति देखी और प्रशासन से तत्काल प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कराने की मांग की.
मुखिया प्रतिनिधि ने कहा कि बारिश प्राकृतिक आपदा के रूप में गरीब परिवारों पर कहर बरपा रही है. ऐसे में जिन परिवारों के मकान गिर गये हैं, उनके नुकसान का आकलन जल्द कराया जाना चाहिए.
उन्होंने पीड़ित परिवारों को आपदा मद से मुआवजा देने के साथ तत्काल राहत उपलब्ध कराने की भी मांग की है. उनका कहना है कि बरसात के बीच बेघर हुए परिवारों को तत्काल सहायता और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था मिलनी चाहिए.
Dumri House Collapse: अब सबसे बड़ा सवाल, बरसात में कहां रहेंगे दोनों परिवार?
डुमरी की घटना सिर्फ दो मकानों के गिरने की कहानी नहीं है. यह उन गरीब परिवारों की मुश्किल भी सामने लाती है, जिनके पास बारिश से बचने के लिए पक्की छत तक नहीं है. सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिलने और अब मकान गिर जाने के बाद दोनों परिवारों की स्थिति और गंभीर हो गयी है.
फिलहाल दोनों परिवार राहत और सुरक्षित छत की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहे हैं. बारिश अभी भी रुक-रुककर हो रही है. ऐसे में तत्काल सहायता नहीं मिलने पर उनकी परेशानी और बढ़ सकती है.
अब प्रशासन के सामने प्रभावित मकानों का सर्वे कराने, नुकसान का आकलन करने और पात्रता के अनुसार राहत उपलब्ध कराने की चुनौती है. स्थानीय स्तर पर भी यही मांग उठ रही है कि बरसात के दौरान बेघर हुए परिवारों को तत्काल सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर न होना पड़े.
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