जमुई. जिला विधिज्ञ संघ में करीब एक करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोपों को लेकर मामला गरमा गया है. संघ के महासचिव पर सोशल मीडिया और अधिवक्ताओं के ग्रुप के माध्यम से लगाए गए आरोपों को लेकर अधिवक्ताओं के एक समूह ने संघ के अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग की है.
200 अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर वाला आवेदन
संघ अध्यक्ष को दिए आवेदन में अधिवक्ताओं ने कहा है कि अधिवक्ता कृष्णा यादव की ओर से सोशल मीडिया और अधिवक्ताओं के विभिन्न ग्रुप के माध्यम से महासचिव पर वित्तीय अनियमितता से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं. आवेदन में कहा गया है कि आरोपों में संघ की राशि के गबन की बात भी कही गई है.
अधिवक्ताओं का कहना है कि इस तरह के गंभीर आरोप सामने आने से जिला विधिज्ञ संघ की मर्यादा, गरिमा और प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है. इसलिए मामले को स्पष्ट करने के लिए संघ स्तर पर प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए.
महासचिव से मांगा जाए स्पष्टीकरण
आवेदन में मांग की गई है कि लगाए गए आरोपों को लेकर संघ के महासचिव से स्पष्टीकरण लिया जाए. इसके साथ ही उन्हें आमसभा की बैठक में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए.अधिवक्ताओं ने कहा कि आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए संबंधित सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए. इससे मामले में पारदर्शिता बनी रहेगी और संघ के सदस्यों के बीच बनी असमंजस की स्थिति भी दूर हो सकेगी.
निष्पक्ष जांच की मांग
अधिवक्ताओं ने कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े आरोपों की समुचित और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. आवेदन में कहा गया है कि जांच के बाद तथ्यों के आधार पर मामले का निष्पादन किया जाए.
साथ ही अधिवक्ताओं ने मामले को सौहार्दपूर्ण वातावरण में सुलझाने पर जोर दिया है. उनका कहना है कि संघ की प्रतिष्ठा और गरिमा बनाए रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए.
आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही
सोशल मीडिया और अधिवक्ताओं के ग्रुप में लगाए गए वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है. ऐसे में आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता. मामले में महासचिव का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. करीब 200 अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर वाले आवेदन के बाद अब निगाह संघ अध्यक्ष की ओर से अपनायी जाने वाली प्रक्रिया पर है. अधिवक्ताओं ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और आमसभा के माध्यम से पूरे मामले को पारदर्शी तरीके से रखा जाए.
