सीआरएस का तीन घंटे तक मैराथन निरीक्षण, तकनीकी पहलुओं पर अफसरों से की पूछताछ
सिमुलतला रेल हादसे की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गयी है. दुर्घटना की तकनीकी व प्रशासनिक पड़ताल को लेकर शनिवार को रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) गुरुप्रकाश ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया.
सिमुलतला रेल हादसे की जांच निर्णायक मोड़ पर जमुई. सिमुलतला रेल हादसे की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गयी है. दुर्घटना की तकनीकी व प्रशासनिक पड़ताल को लेकर शनिवार को रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) गुरुप्रकाश ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया. करीब तीन घंटे तक चले मैराथन निरीक्षण के दौरान सीआरएस ने न सिर्फ घटनास्थल का सूक्ष्म मुआयना किया, बल्कि संबंधित अधिकारियों से तकनीकी और तीखे सवाल भी किये, इससे रेलवे महकमे में हलचल का माहौल बना रहा. जांच की शुरुआत मुख्य घटनास्थल से पहले बड़ुआ नदी के तट से हुई, जहां दुर्घटनाग्रस्त बोगियों और क्षतिग्रस्त पटरियों का मलबा रखा गया था. सीआरएस ने करीब 40 मिनट तक टूटी पटरियों, फास्टनिंग और अन्य तकनीकी हिस्सों की बारीकी से जांच की. इस दौरान उनके साथ एडीआरएम प्रवीण कुमार प्रेम, को-ऑर्डिनेशन अधिकारी राजीव कुमार सहित पी-वे विभाग के अभियंता मौजूद थे. सीआरएस ने पटरियों की स्थिति, रखरखाव और सुरक्षा मानकों को लेकर अभियंताओं से कई अहम सवाल पूछे. इसके बाद सीआरएस मुख्य घटनास्थल ब्रिज संख्या 676 पर पहुंचे. उनके हाथ में दुर्घटना से संबंधित नक्शा और चार्ट था, जिसके आधार पर वे हर बिंदु का जमीनी हकीकत से मिलान करते नजर आये. जांच की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पटरियों में लगी चाबियों तक की गिनती की और दुर्घटना से पहले डिब्बों की स्थिति को समझने का प्रयास किया. एक-एक तकनीकी पहलू पर सवालों की झड़ी लगने से मौके पर मौजूद अधिकारी दबाव में दिखे. निरीक्षण के दौरान सीआरएस ने बड़ुआ नदी पर बने ब्रिज 676 पर इस सिरे से उस सिरे तक कई बार पैदल निरीक्षण किया और जहां भी संदेह हुआ, वहां रुककर जांच की. वे करीब तीन घंटे तक घटनास्थल पर डटे रहे. जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए सीआरएस ने मीडिया से दूरी बनाए रखी. स्थानीय मीडिया को उनसे बातचीत की अनुमति नहीं दी गयी. सीआरएस के निजी सचिव ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले किसी प्रकार का बयान जारी नहीं किया जायेगा. सीआरएस के इस गहन निरीक्षण के बाद अब सभी की निगाहें उनकी जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि रिपोर्ट आने के बाद सिमुलतला रेल हादसे के वास्तविक कारणों से पर्दा उठेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जायेंगे.
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