जमुई जिले के सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत मरकट्टा गांव में गुरुवार को उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया, जब गांव के एक तालाब में बच्चे के डूबने की खबर सामने आई. स्थानीय महिलाओं के दावे के बाद आनन-फानन में एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को बुलाया गया. टीम ने मौके पर पहुंचकर तालाब में गहन खोजबीन और सर्च अभियान चलाया, हालांकि काफी मशक्कत के बाद भी किसी बच्चे के डूबने या लापता होने की पुष्टि नहीं हो सकी है.
महिलाओं के दावे से फैली सनसनी
घटनाक्रम की शुरुआत गांव की कुछ महिलाओं द्वारा जताई गई आशंका से हुई:
- महिलाओं का दावा: महिलाओं ने पुलिस और ग्रामीणों को बताया कि उन्होंने तालाब के पास चार बच्चों को देखा था, जिनमें से एक बच्चा तालाब में चला गया और बाकी तीन बच्चे डरकर वहां से भाग खड़े हुए.
- प्रत्यक्षदर्शी की कमी: महिलाओं की सूचना पर जब ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंचे तो कोई भी ऐसा प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला जो बच्चे के डूबने की घटना की निश्चित रूप से पुष्टि कर सके.
SDRF टीम ने 3 घंटे चलाया सर्च ऑपरेशन
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत एसडीआरएफ टीम को मरकट्टा गांव भेजा:
सर्च अभियान का हाल: "एसडीआरएफ के गोताखोरों ने करीब तीन घंटे से अधिक समय तक तालाब के चप्पे-चप्पे को खंगाला. लगातार चलाए गए इस सर्च ऑपरेशन में टीम को कोई सफलता नहीं मिली और न ही तालाब से कोई संदिग्ध सामग्री या बच्चा बरामद हुआ."
अब तक किसी परिवार ने नहीं दी बच्चे के गायब होने की सूचना
पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा मरकट्टा और आसपास के अन्य नजदीकी गांवों में भी लगातार माइकिंग और पूछताछ की जा रही है ताकि लापता बच्चे का पता लगाया जा सके:
- प्रशासनिक स्थिति: खबर लिखे जाने तक किसी भी ग्रामीण या आसपास के परिवार द्वारा अपने बच्चे के लापता होने की कोई लिखित या मौखिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है.
- भीड़ और एहतियात: इसके बावजूद एहतियात के तौर पर तालाब किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा है और प्रशासनिक टीम पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है.
