चकाई प्रखंड में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना की जमीनी स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं. प्रखंड प्रमुख उर्मिला देवी के क्षेत्र भ्रमण और स्थल निरीक्षण में कई नल-जल इकाइयां बंद या खराब मिलीं. प्रमुख के अनुसार, प्रखंड में करीब 80 से 90 प्रतिशत नल-जल इकाइयां बंद या खराब स्थिति में हैं. उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीएम जमुई और डीडीसी जमुई को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करने की बात कही है.
20 सितंबर को तीन पंचायतों में हुआ स्थल निरीक्षण
प्रमुख उर्मिला देवी के अनुसार, 20 सितंबर को पेटरपहाड़ी, चंद्रमंडीह और माधोपुर पंचायत के विभिन्न गांवों में नल-जल योजना का स्थल निरीक्षण किया गया. पेटरपहाड़ी पंचायत के पिपरा स्थित एसटी समुदाय क्षेत्र, दरवेयाडीह के मोहली समुदाय क्षेत्र, करमाटांड़, लेदबारा, बाराटांड़ और जलखरिया में बड़ी संख्या में नल-जल इकाइयां बंद मिलीं.
दरवेयाडीह गांव के वार्ड संख्या 10 और छह में दो इकाइयों की जांच की गयी. इनमें एक पूरी तरह बंद थी, जबकि दूसरी चालू होने के बावजूद घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा था. वार्ड संख्या तीन के करमाटांड़ में चारों इकाइयां बंद मिलीं. वार्ड संख्या नौ की दोनों इकाइयां भी बंद पायी गयीं. इसके अलावा वार्ड संख्या 13, 14 और 15 में भी योजना के बंद रहने की शिकायत मिली.
कहीं पाइप फटा, कहीं नल और पाइप गायब
चंद्रमंडीह पंचायत के कोराने गांव में जांच के दौरान दोनों नल-जल इकाइयां बंद मिलीं. ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें कई महीनों से योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. माधोपुर पंचायत के हिरनाटांड़ महादलित टोला में भी लंबे समय से नल-जल योजना बंद रहने की बात सामने आयी.
प्रमुख ने बताया कि उनके स्तर से करीब 40 से 45 नल-जल इकाइयों की स्थल पर जांच की गयी. इनमें महज चार-पांच इकाइयां ही चालू मिलीं. कई स्थानों पर पाइप फटे मिले, जबकि कुछ जगहों पर नल और पाइप गायब मिले. इससे योजना के निर्माण के साथ-साथ उसके रखरखाव और नियमित संचालन पर भी सवाल उठ रहे हैं.
सभी 23 पंचायतों में जांच की मांग
प्रखंड प्रमुख उर्मिला देवी ने कहा कि सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य प्रत्येक घर तक नियमित पेयजल पहुंचाना है. यदि बड़ी संख्या में नल-जल इकाइयां बंद हैं, तो पूरे प्रखंड की निष्पक्ष और विस्तृत जांच जरूरी है.
उन्होंने चकाई की सभी 23 पंचायतों में नल-जल योजना की जांच के लिए राज्यस्तरीय टीम अथवा गोपनीय कमेटी गठित करने की मांग की है. साथ ही पंचायतस्तरीय जनप्रतिनिधियों को शामिल कर प्रत्येक नल-जल इकाई की जांच कराने और बंद योजनाओं को तत्काल चालू कराने की मांग की है.
प्रमुख के अनुसार, मामले को लेकर मुख्यमंत्री बिहार सरकार, मुख्य सचिव, डीएम जमुई और डीडीसी जमुई को पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है, ताकि ग्रामीणों को नल-जल योजना का वास्तविक लाभ मिल सके.
