जमुई जिले के सुदूरवर्ती चकाई प्रखंड क्षेत्र में लगातार बढ़ रही चोरी की वारदातों ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है. क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और अपराध के बढ़ते ग्राफ को लेकर चकाई प्रखंड प्रमुख उर्मिला देवी ने गहरी चिंता व्यक्त की है.
चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए प्रमुख ने एक साथ पांच थाना क्षेत्रों—चकाई, चंद्रमंडीह, बिचकोड़वा, चिहरा और सिमुलतला—के थानाध्यक्षों को आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है. पत्र के जरिए उन्होंने सभी पुलिस अधिकारियों से अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में दिन व रात की पुलिस पेट्रोलिंग को चाक-चौबंद करने और सघन गश्ती अभियान चलाने की पुरजोर मांग की है.
पांच थानों के बावजूद पुलिसिंग कमजोर, आमजन में भय का माहौल
प्रखंड प्रमुख उर्मिला देवी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि चकाई प्रखंड के विभिन्न ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों से लगातार घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में चोरी की सूचनाएं आ रही हैं. वारदातों के अनवरत सिलसिले से स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों में भारी असुरक्षा व दहशत का माहौल बना हुआ है.
प्रमुख ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपराध नियंत्रण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चकाई प्रखंड क्षेत्र में हाल ही में दो नए थानों का सृजन किया गया था. इसके बावजूद, पूरे प्रखंड में अब कुल पांच थाने क्रियाशील होने के बाद भी पुलिस की रात्रि गश्ती व्यवस्था बेहद लचर और अप्रभावी साबित हो रही है.
गरीब परिवारों पर पड़ रही सीधी मार, जीवनभर की पूंजी पर हाथ साफ
उर्मिला देवी ने रेखांकित किया कि इन वारदातों में सबसे ज्यादा नुकसान दिहाड़ी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर गरीब परिवारों को उठाना पड़ रहा है. एक ही झटके में उनके जीवनभर की जमा-पूंजी, अनाज और छोटे-मोटे जेवरात चोरी हो जाने से वे गंभीर आर्थिक संकट के दलदल में फंस जाते हैं.
पुलिस की शिथिलता के कारण शातिर चोर लगातार चिन्हित इलाकों को अपना निशाना बना रहे हैं.
प्रमुख के अपने घर में हुई थी चोरी, 3 माह बाद भी कार्रवाई शून्य
पत्र में प्रखंड प्रमुख ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताते हुए अपने ही मामले का उदाहरण दिया. उन्होंने उल्लेख किया कि गत 15 जून की रात चोरों ने उनके स्वयं के घर और उनके देवर के आवास को निशाना बनाते हुए लाखों की संपत्ति पर हाथ साफ कर दिया था.
घटना के तुरंत बाद 16 जून को संबंधित थाने में नामजद व लिखित प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. इसके बावजूद, घटना के करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस न तो चोरों का कोई सुराग लगा सकी है और न ही सामान की बरामदगी हो पाई है. जब जन-प्रतिनिधियों के मामलों में यह सुस्ती है, तो आम जनता की सुरक्षा का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.
संवेदनशील इलाकों में फिक्स पिकेट और नियमित पेट्रोलिंग की दरकार
प्रमुख ने सभी पांचों थानों के प्रभारियों से अपील की है कि वे चोरी की दृष्टि से संवेदनशील गांवों और मुख्य चौराहों पर विशेष निगरानी रखें.
उन्होंने कहा कि शाम ढलते ही प्रमुख संपर्क मार्गों, हाट-बाजारों और सीमावर्ती इलाकों में पुलिस की दृश्यता (विजिबिलिटी) बढ़ाई जाए. नियमित पेट्रोलिंग और मुस्तैद गश्ती से ही अपराधियों में कानून का खौफ पैदा होगा और आम नागरिकों के बीच पुलिस प्रशासन के प्रति सुरक्षा का विश्वास बहाल हो सकेगा.
