अस्पताल के लिए कोई स्थायी और सुरक्षित भवन न होने के कारण यहाँ तैनात स्वास्थ्य कर्मी रोजाना सुबह अपने बैग में दवाइयां भरकर लाते हैं और शाम को बची हुई दवाइयां वापस बैग में भरकर घर ले जाते हैं. विडंबना यह है कि जिस सरकारी/संस्थागत भवन में इस अस्पताल को विधिवत संचालित होना था, उस पर कथित रूप से दबंगों और स्थानीय लोगों का अवैध कब्जा है और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले पर मूकदर्शक बना हुआ है.
अस्पताल के चिह्नित भवन में चल रही सिलाई दुकान, कमरों में भरा है सीमेंट
स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, ललमटिया गांव में एक संस्था का स्कूल भवन वर्षों से बंद पड़ा है, जिसे स्वास्थ्य केंद्र के लिए चिह्नित किया गया था. वर्तमान में इस भवन पर 'हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर' का आधिकारिक बोर्ड भी टंगा है और अंदर अस्पताल के कुछ बुनियादी उपकरण भी धूल फांक रहे हैं. इसके बावजूद:
- दर्जी की दुकान: भवन के एक मुख्य कमरे में एक स्थानीय दर्जी मास्टर धड़ल्ले से सिलाई का व्यावसायिक कार्य कर रहे हैं.
- गोदाम में तब्दील: दूसरे कमरों में निजी निर्माण कार्य के लिए गिट्टी, बालू और सीमेंट की बोरियां रखकर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है.
तीन कर्मियों की तैनाती, पर बैठने तक की जगह नहीं
सरकार की ओर से इस वैलनेस सेंटर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक सीएचओ (CHO) और दो एएनएम (ANM) की बकायदा तैनाती की गई है. स्वास्थ्य कर्मियों की मुस्तैदी के बावजूद संसाधनों के अभाव में पूरी व्यवस्था दयनीय है:
- रोज की ढोना-ढोई: अस्पताल में दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए कोई अलमारी या रेफ्रिजरेटर की व्यवस्था नहीं है. आईसीडीएस (ICDS) द्वारा दिए गए एक छोटे से बॉक्स के अलावा कोई स्ट्रक्चर नहीं है, जिससे कर्मी रोज बैग में ही दवाइयां ढोने को मजबूर हैं.
- जांच व्यवस्था ठप: केंद्र पर आने वाले गंभीर मरीजों की आवश्यक पैथोलॉजिकल जांच, उपचार और उनके बैठने तक की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है, जिससे लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा लाभ नहीं मिल पा रहा है.
मासूम बच्चों पर मंडरा रहा है गंभीर बीमारियों और संक्रमण का खतरा
इस लचर व्यवस्था का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि जिस कमरे में छोटे-छोटे मासूम बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा, खेलकूद और पोषण (पोषाहार) मिलना चाहिए, उसी सीमित जगह पर रोजाना संक्रामक बीमारियों (जैसे- टीबी, मौसमी सर्दी, खांसी, तेज बुखार और वायरल इन्फेक्शन) से पीड़ित ग्रामीण इलाज कराने पहुंच रहे हैं. एक ही बंद कमरे में बीमार वयस्कों और मासूम बच्चों के एक साथ बैठने से बच्चों में गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे अभिभावक भी सहमे हुए हैं.
कहते हैं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO)
आंगनबाड़ी केंद्र से मजबूरन अस्पताल चलाने और व्यवस्था की लाचारी पर केंद्र के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने विभाग की पोल खोली:
"हमारे पास अस्पताल का अपना कोई स्वतंत्र या सुरक्षित सरकारी भवन उपलब्ध नहीं है. ऐसी विकट परिस्थिति में ग्रामीणों को प्राथमिक चिकित्सा देने के लिए हमें मजबूरी में आंगनबाड़ी केंद्र के एक छोटे से हिस्से का सहारा लेना पड़ रहा है. रोज दवाइयां बैग में लाना और ले जाना हमारी सुरक्षा और दवाओं की गुणवत्ता के लिए भी सही नहीं है. इस पूरी बदहाली और भवन पर अवैध कब्जे की लिखित रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के वरीय पदाधिकारियों को भेजी जा चुकी है. जैसे ही प्रशासन हमें भवन खाली कराकर उपलब्ध कराता है, अस्पताल को सुव्यवस्थित तरीके से स्थानांतरित कर दिया जाएगा." — शुभम कुमार, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), ललमटिया
अब देखना यह है कि जमुई जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा इस अवैध कब्जे को हटाने के लिए क्या कानूनी कदम उठाता है, ताकि मासूम बच्चों का भविष्य और ग्रामीणों का स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित हो सके.
