बरहट में एक महीने में ही बुझने लगी विकास की रोशनी, कटौना पंचायत की कई सोलर लाइटें खराब, रखरखाव पर उठे सवाल

बरहट में लाखों की लागत से लगीं सोलर लाइटें एक महीने में ही खराब हो गईं. कटौना पंचायत में विकास की रोशनी बुझने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है. जानिए क्या है पूरा मामला.

बरहट में गांवों की गलियों को रोशन करने के उद्देश्य से लगायी गयी सोलर लाइटें महज एक महीने में ही जवाब देने लगी हैं. मुख्यमंत्री के सात निश्चय पार्ट-2 के तहत बरहट प्रखंड की कटौना पंचायत में लगायी गयी कई सोलर लाइटें अब बंद पड़ी हैं. कुछ लाइटें थोड़ी देर रोशनी देने के बाद बंद हो जाती हैं. बिजली आपूर्ति बाधित होते ही पंचायत की गलियां फिर अंधेरे में डूब जाती हैं.

शिकायत के बाद भी नहीं हुई मरम्मत

लाइटों के खराब होने की शिकायत जनप्रतिनिधियों ने संबंधित पदाधिकारियों और संवेदक से कई बार की है. इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है. ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि लाखों रुपये खर्च कर लगायी गयी इन लाइटों की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई और खराब होने के बाद इनके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है.

कटौना पंचायत के मुखिया कपिल देव प्रसाद ने बताया कि पंचायती राज विभाग के माध्यम से वार्ड संख्या 2 में अजय यादव के घर के पास, वार्ड संख्या 13 में जितेंद्र तांती के घर के पास, वार्ड संख्या 8 में विकास तिवारी के घर के पास और वार्ड संख्या 6 में उपेंद्र दुबे के घर के पास सोलर लाइट लगायी गयी थी.

शुरुआत में चलीं, एक महीने बाद बिगड़ने लगीं

मुखिया के अनुसार शुरुआत में लाइटें ठीक तरह से काम कर रही थीं, लेकिन करीब एक महीने बाद अधिकांश लाइटों में खराबी आने लगी. कुछ लाइटें जलने के थोड़ी देर बाद बंद हो जाती हैं, जबकि कुछ पूरी तरह बंद पड़ी हैं. उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों और संवेदक को कई बार इसकी जानकारी दी गयी, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं करायी गयी है.

बिजली कटते ही बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार सोलर लाइटों का उद्देश्य बिजली आपूर्ति बाधित रहने के दौरान भी गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थानों को रोशन रखना था. लेकिन लाइटें खराब होने के कारण बिजली कटने के बाद पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है. आंधी और बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने पर ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है.

योजना के दावे पर सवाल, जमीन पर अंधेरा

सात निश्चय पार्ट-2 के तहत गांवों को रोशन करने के उद्देश्य से स्कूल, अस्पताल, धार्मिक स्थल, चौक-चौराहों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सोलर लाइटें लगायी गयी थीं. योजना के तहत ग्राम सभा के माध्यम से लाइट लगाने के स्थानों का चयन किया गया था. लेकिन कम समय में ही लाइटों के खराब होने से योजना के क्रियान्वयन, गुणवत्ता और रखरखाव की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

क्या कहते हैं बीडीओ

प्रखंड विकास पदाधिकारी अनिल कुमार मिस्त्री ने बताया कि जिस एजेंसी के माध्यम से सोलर लाइट लगायी गयी थी, उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गयी है और एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. अब नई एजेंसी से काम कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बंद पड़ी सोलर लाइटों को दुरुस्त कराने की दिशा में भी कदम उठाये जायेंगे.

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By पंकज कुमार सिंह

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