तालाब में डूब रही दो बच्चियों को साहसी बालक ने बचाया, एक की मौत

सिकंदरा थाना क्षेत्र के रवैय गांव में रविवार की संध्या पूजा सामग्री विसर्जन के दौरान तालाब में डूबने से 12 वर्षीय बच्ची नंदनी कुमारी की मौत हो गयी

सिकंदरा.

सिकंदरा थाना क्षेत्र के रवैय गांव में रविवार की संध्या पूजा सामग्री विसर्जन के दौरान तालाब में डूबने से 12 वर्षीय बच्ची नंदनी कुमारी की मौत हो गयी. इस दौरान गांव का एक बालक सूरज कुमार पिता मकेश्वर महतो ने अपने अदम्य साहस और बहादुरी का परिचय देते हुए दो बच्चियों की जान बचाने में सफल रहा.

जानकारी के मुताबिक रवैय गांव निवासी विकास साव की 12 वर्षीय पुत्री नंदनी कुमारी अपनी दो सहेलियों के साथ बड़ी तालाब में पूजा सामग्री विसर्जित करने गयी थी. विसर्जन के दौरान एक बच्ची का पैर फिसला और वो गहरे पानी मे चली गयी. इस दौरान डूब रही बच्ची को बचाने के प्रयास में साथ गयी दोनों सहेलियां भी गहरे पानी में उतर गयी और एक दूसरे को बचाने के क्रम में तीनों बच्चियां डूबने लगीं. इसी बीच पास में मौजूद 12 वर्षीय सूरज कुमार ने बिना कुछ सोचे-समझे तालाब में छलांग लगा दी और अपने हौसले के दम पर दो बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. लेकिन गहरे पानी में डूब चुकी नंदनी को बचाया नहीं जा सका. घटना की सूचना परिजनों और ग्रामीणों तक पहुंचते ही अफरा-तफरी मच गई. ग्रामीणों ने पूरी रात नंदनी की खोजबीन की, लेकिन नहीं मिल सकी. ग्रामीणों ने घटना की सूचना प्रशासन को भी दी. लेकिन सोमवार की सुबह करीब सात बजे नंदनी का शव तालाब में उपलाता हुआ मिला. शव मिलते ही गांव में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया.

तालाब की गहरायी 20 फीट से अधिक

ग्रामीणों का कहना है कि तालाब की गहरायी 20 फीट से अधिक है. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जमुई सदर अस्पताल भेज दिया. घटना के बाद गांव में सूरज कुमार की बहादुरी की चर्चा हर जुबां पर है. महज 12 वर्ष की आयु में जिस साहस और तत्परता से उसने तालाब में डूब रही दो किशोरियों को बचाया, वह काबिले तारीफ है. लोगों का मानना है कि सूरज की वीरता को प्रशासन व सरकार के स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों और युवाओं में भी ऐसे साहसी कार्यों के लिए प्रेरणा जागृत हो सके. एक ओर जहां नंदनी की असमय मौत से पूरा गांव गमगीन है, दूसरी ओर सूरज की बहादुरी ने यह संदेश दिया कि साहस और तत्परता से बड़ी से बड़ी विपत्ति को टाला जा सकता है.

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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