होम सेंटर नहीं रहने से परेशान हैं परीक्षार्थी
चकाई/सरौन : कई वर्षों के बाद शिक्षा विभाग की बेतुके फरमान के कारण चकाई प्रखंड के मैट्रिक की परीक्षा में भाग लेने वाले हजारों छात्र छात्राओं को होम सेंटर से वंचित होना पड़ रहा है. वही होम सेंटर नहीं रहने के कारण छात्र-छात्राओं को जहां प्रतिदिन 60 से 70 किलोमीटर की दूरी तय कर झाझा व जमुई में पड़े मैट्रिक सेंटरों में जाकर मैट्रिक परीक्षा देने के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.जिस कारण छात्र-छात्राएं काफी निराश हैं. वहीं अभिभावकों को भी काफी आक्रोशित देखा जा रहा है.
बताते चलें कि पिछले कई वर्षों से छात्र छात्राएं की परेशानी को देखते हुए शिक्षा विभाग द्वारा चकाई प्रखंड के मैट्रिक परीक्षार्थियों का सेंटर प्लस टू उच्च परियोजना विद्यालय चकाई एवं प्लस टू परियोजना बालिका उच्च विद्यालय चकई में रखा जाता था. वर्ष 2017 में भी इन्हीं दोनों विद्यालयों में होम सेंटर रखा गया था.
जहां एक भी छात्र या छात्रा कदाचार के आरोपों में जेल नहीं हुई और कदाचार मुक्त परीक्षा शांतिपूर्ण संपन्न हुई .वर्ष 2016 में मैट्रिक परीक्षा का विजिट करने आए तत्कालीन जिलाधिकारी शशिकांत तिवारी ने पूर्ण रूप से कदाचार मुक्त परीक्षा चलने की बात कही जो समाचार पत्रों में भी छपा था. इसके बावजूद पता नहीं किस कारणवश इस गरीब एवं पिछड़े प्रखंड के छात्र-छात्राओं को होम सेंटर से वंचित कर उन्हें मैट्रिक की परीक्षा देने 60 से 70 किलोमीटर दूर भेज दिया गया .यह सोचने वाली बात है .पहले छात्र-छात्राएं घर से विद्यालय जा कर आराम से बिना कोई रुपया खर्च किए परीक्षा दे देती थी मगर अब इनकी अभिभावकों को आर्थिक परेशानी के बावजूद या तो जमुई, झाझा में डेरा लेकर परीक्षा दिलवानी पड़ेगी या नहीं तो प्रतिदिन वाहन रिजर्व कर परीक्षा दिलवाने
जाना होगा.
प्रतिदिन 70 किलोमीटर दूर परीक्षा देने जाने में बर्बाद हो जाते हैं समय व इनर्जी
परीक्षार्थी संध्या कुमारी ने बताया कि होम सेंटर रहने से परीक्षा की तैयारी का घर में मौका मिलता था तथा दौड़-धूप की परेशानी से भी बच जाती थी. पल्लवी कुमारी ने बताया कि चाहे जमुई हो,झाझा हो या चकाई हो हर जगह पूरी कड़ाई से कदाचार मुक्त परीक्षा ली जाती फिर क्या तुक था कि हम लोगों का होम सेंटर समाप्त कर हमें इतनी दूर भेज दिया गया.
वहीं मीनाक्षी ने बताया कि शिक्षा विभाग के इस बेतुके निर्णय के कारण जहां हम लोगों को इतनी दूर भाग दौड़ करने के कारण परीक्षा की तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. वही आर्थिक परेशानी भी हो रही है. वहीं मैट्रिक के परीक्षार्थी सचिन कुमार ने बताया कि होम सेंटर में भी परीक्षा के दौरान काफी सख्ती रहती थी.चकाई में मैट्रिक परीक्षा का इतिहास कदाचारमुक्त रहा है फिर भी यहां से होम सेंटर हटाना समझ से परे है .वही अंकित कुमार ने बताया कि होम सेंटर हटाने का निर्णय हम गरीब छात्रों पर काफी भारी प्रभाव पड़ा है .हमें कर्ज लेकर झाझा में महंगे दामों पर डेरा लेना पड़ा है .ऊपर से अन्य परेशानी अलग है. वहीं अभिषेक ने बताया कि अगर सरकार द्वारा पूर्व में ही अच्छे एवं काबिल शिक्षकों की बहाली कर हमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाती तो यह सब करने की नौबत ही नहीं आती.
