दृढ़ निश्चय से रूपा बदल रही लाल गलियारे की तस्वीर
खैरा (जमुई) : कहते हैं जब आप आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय के साथ किसी काम को करने में लग जाते हैं तब हर दीवार छोटी हो जाती है. फिर चाहे वह दीवार समाज की किसी बंदिश से बनी हो या आर्थिक तंगी से. यदि कोई इंसान मन में कुछ करने को ठान लेता है तब वह समाज में एक नजीर बनकर सामने आता है.
कुछ ऐसी ही कहानी लिख रही है खैरा प्रखंड के नक्सलग्रस्त क्षेत्र चौकीटांड़ की 12 वर्षीया रूपा कुमारी. उसने हाल ही में तेलंगाना में आयोजित 15वीं सीनियर नेशनल रग्बी प्रतियोगिता में अंडर-14 टच रग्बी में राज्य का प्रतिनिधित्व कर सफलता का परचम लहराया है. हालांकि इस टूर्नामेंट में बिहार की अंडर-14 की टीम प्री-क्वार्टर फाइनल तक ही जा सकी, परंतु इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के बाद रूपा के हौसलों ने ऊंची उड़ान भरनी शुरू कर दी है. चौकीटांड गांव नक्सलग्रस्त इलाका माना जाता है, जहां आज भी विकास की झलक देखने को नहीं मिलती है.
आमतौर पर समाज में आज भी हम बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ रहे हैं तथा बेटियों को उनका हक दिलाने की आजमाइश में लगे हैं. ऐसे में रूपा ने एक कदम आगे निकल कर यह दिखा दिया है कि सwमाज के हर मायने में बेटियां बेटों से कहीं कम नहीं हैं. उसने कहा कि मेरे पिता ने हमेशा मेरे सपनों को साकार करने में मेरी मदद की है.
करना चाहती है देश का नाम रोशन, अब तक नहीं मिली मदद
पिता ऑटो चलाकर करते हैं परिवार का गुजारा
बताते चलें कि रूपा के पिता राजेंद्र भगत ऑटो चला कर परिवार का गुजारा करते हैं. रूपा अपने पांच भाई-बहनों में 16 वर्षीया सुलेखा, 14 वर्षीया बबीता के बाद वह तीसरे नंबर पर है तथा 10 वर्षीय एक भाई अरविंद और आठ वर्षीया राखी से बड़ी है. वह बताती है कि मेरे खेल को लेकर मेरे पिता का हमेशा सकारात्मक सहयोग मिलता रहा है. जब भी मैं कहीं खेलने जाती हूं या मुझे किसी सामान की जरूरत होती है तो मेरे पिता अपनी जरूरतों को कम कर मेरी जरूरतों को पूरा करते हैं. ऐसे में मैं अपने तथा अपने परिवार सहित समाज, राज्य और देश का भी नाम ऊंचा करना चाहती हूं.
नेशनल लेवल पर प्रतिनिधित्व करने की तमन्ना
कहने को तो खेल मंत्रालय के द्वारा खिलाड़ियों को मदद करने की बात कही जाती है, पर आज भी जमीनी स्तर पर कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनकी प्रतिभा आर्थिक सहायता के अभाव में कुंठित होती जा रही है.
रूपा बताती है कि उसे किसी प्रकार की सरकारी सहायता आज तक नहीं मिली है. न तो उसे सरकारी स्तर पर खेल प्रसाधन ही मुहैया कराया जाता है. इसके बावजूद वह नेशनल लेवल पर देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती है. इधर रूपा की इस सफलता पर समाज सहित पूरे चौकीटांड़ गांव वासियों में हर्ष देखा जा रहा है.
