IRCTC Tender Scam: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC टेंडर घोटाला मामले में लालू परिवार और चार अन्य लोगों पर आरोप तय किए जाने का आदेश दिया. कोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार के सियासी गलियारे में राजनीतिक नेताओं की ओर से बयानबाजी तेज हो गई है. बीजेपी नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, कोर्ट ने जो ऑब्जर्व किया उसके अनुसार फैसला सुनाया. इससे किसी को आपत्ति नहीं होना चाहिए.
कोर्ट में विशेष न्यायाधीश ने क्या कहा?
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सात लोगों के खिलाफ 'पुख्ता संदेह है. जांच का स्वरूप, समय और तरीका ऐसा नहीं लगता कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित हो, जैसा कि आरोपियों के वकीलों ने दलील दी है. कोर्ट ने 9 आरोपियों को मुक्त भी किया है. आरोपियों को 3 अक्टूबर को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश होना पड़ेगा.
क्या लगाए गए हैं आरोप?
सीबीआई की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद ने 2004 में आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव का काम एक कंपनी को सौंप दिया था. इसके बदले उन्हें पटना में एक बेशकीमती जमीन रिश्वत के तौर पर मिली थी.
यह प्रेम चंद गुप्ता ( पूर्व केंद्रीय मंत्री) की पत्नी सरला गुप्ता की एक बेनामी कंपनी के जरिए प्राप्त की गई थी. सीबीआई की इसी प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था.
क्या है IRCTC टेंडर घोटाला?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे. आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करके रांची और पुरी में स्थित IRCTC के दो होटलों के रखरखाव का ठेका एक निजी कंपनी, सुजाता होटल्स को नियमों को ताक पर रखकर दिया था. इसके बदले में, यह आरोप लगाया गया कि सुजाता होटल्स के मालिकों ने बेनामी तरीके से दिल्ली में लालू परिवार के सदस्यों के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति ट्रांसफर की.
इस पूरे मामले में यह भी कहा गया है कि होटल का ठेका देते समय नियमों का पालन नहीं किया गया. जैसे कि, होटल के रखरखाव के लिए कोई खुली बोली (ओपन टेंडर) नहीं बुलाई गई और न ही जरूरी क्लीयरेंस ली गई. यह सब कथित तौर पर लालू यादव के प्रभाव में हुआ.
कैसे सामने आया मामला और क्या है आरोप?
यह मामला तब सामने आया जब सीबीआई ने 2017 में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव सहित कई लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया. सीबीआई का आरोप है कि इस सौदे में रिश्वत के तौर पर संपत्ति का लेन-देन हुआ. फिर इस मामले में जांच के जिम्मेदारी ईडी के हिस्से में आई. इसके बाद से लालू परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई फिर से तेज हो गई है.
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