Bankipur By Election Result: इन 5 वजहों से बीजेपी का गढ़ जीते प्रशांत किशोर, पीके के मास्टरस्ट्रोक से पस्त हुई बीजेपी और आरजेडी

Bankipur By Election Result: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का नतीजा बिहार की राजनीति के लिए बड़ा संदेश लेकर आया है. जन सुराज के प्रशांत किशोर ने भाजपा के लंबे समय से मजबूत गढ़ में जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया. इस जीत के पीछे कई वजहें रहीं, लेकिन पांच ऐसे बड़े कारण हैं जिन्होंने पूरे चुनाव का रुख बदल दिया.

Bankipur By Election Result: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है. लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही इस सीट पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन चुनाव का नतीजा उसके पक्ष में नहीं गया. आइए जानते हैं वे पांच बड़े कारण, जिन्होंने इस चुनाव में बड़ा फर्क पैदा किया.

उम्मीदवार बदलने का फैसला भाजपा पर भारी पड़ा

भाजपा ने पहले अभिषेक बंटी को उम्मीदवार बनाया था. उन्होंने नामांकन भी दाखिल किया और पार्टी के बड़े नेताओं ने उनके साथ चुनाव प्रचार की शुरुआत भी कर दी थी. लेकिन बाद में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया. इसके बाद भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया. चुनाव के बीच उम्मीदवार बदलने से विपक्ष को मुद्दा मिला और कई वोटरों के बीच भ्रम की स्थिति भी बनी. इसका असर चुनाव पर दिखाई दिया.

प्रशांत किशोर ने पूरे चुनाव की दिशा बदल दी

प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरते ही बांकीपुर का मुकाबला राज्य का सबसे चर्चित चुनाव बन गया. उन्होंने बड़े-बड़े मंचों से ज्यादा घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया. प्रचार के दौरान स्थानीय समस्याओं, रोजगार, शिक्षा और विकास जैसे मुद्दों पर फोकस रखा. इससे चुनाव का माहौल पूरी तरह बदल गया और मुकाबला भाजपा बनाम जन सुराज बन गया.

बूथ मैनेजमेंट में जन सुराज आगे रही

भाजपा को इस सीट पर हमेशा मजबूत संगठन का फायदा मिलता रहा है. लेकिन इस बार जन सुराज ने बूथ स्तर तक पूरी तैयारी की. पार्टी की टीम लगातार लोगों से संपर्क करती रही और समर्थकों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने पर खास ध्यान दिया. दूसरी ओर कम मतदान ने भाजपा की रणनीति को नुकसान पहुंचाया. माना गया कि पार्टी अपने सभी समर्थकों को मतदान केंद्र तक नहीं ला सकी.

युवा वोटरों का झुकाव

इस चुनाव में पहली बार वोट डालने वाले और युवा मतदाताओं की भूमिका भी अहम मानी गई. चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर युवाओं के बीच जन सुराज की सक्रियता ज्यादा दिखाई दी. कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं के एक वर्ग का समर्थन प्रशांत किशोर की ओर गया, जिससे उन्हें फायदा मिला.

राजद का वोट बैंक पूरी तरह साथ नहीं आया

पिछले विधानसभा चुनाव में राजद इस सीट पर दूसरे स्थान पर रही थी. लेकिन इस बार पार्टी तीसरे नंबर पर पहुंच गई. चुनाव के दौरान राजद का प्रचार अपेक्षा के मुताबिक मजबूत नहीं दिखा. कई इलाकों में पार्टी को अपने पारंपरिक वोट भी पहले की तरह नहीं मिले. इसका फायदा जन सुराज को मिला और मुकाबला भाजपा और जन सुराज के बीच सिमट गया.

भाजपा ने पूरी ताकत लगाई, फिर भी नहीं बचा गढ़

बांकीपुर सीट बचाने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लगातार चुनाव प्रचार किया. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई बड़े नेताओं ने भी यहां सभाएं कीं. सांसद, विधायक और संगठन के पदाधिकारियों को भी चुनाव प्रचार में लगाया गया. इसके बावजूद जन सुराज ने लगातार बढ़त बनाए रखी और आखिर में जीत दर्ज कर ली.

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बिहार की राजनीति को मिला नया संदेश

बांकीपुर का नतीजा सिर्फ एक सीट की जीत-हार नहीं माना जा रहा. इस चुनाव ने यह दिखाया कि बिहार की राजनीति में अब नए राजनीतिक विकल्प भी चुनौती देने की स्थिति में हैं. भाजपा के लिए यह आत्ममंथन का मौका है, जबकि जन सुराज के लिए यह बड़ी राजनीतिक सफलता मानी जा रही है. वहीं राजद को भी अपने संगठन और वोट बैंक को लेकर नई रणनीति बनानी होगी.

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लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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