Hajipur News : आस्था और फूलों की सजावट से सजेगा मां का मंडप

मंदिर की दुर्गापूजा समिति के सदस्य इस बार धूमधाम से पूजा की तैयारियों में जुटे हुए हैं.

हाजीपुर. हाजीपुर बागमली स्थित दो सौ वर्ष पहले स्थापित जगदंबा स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. मंदिर की दुर्गापूजा समिति के सदस्य इस बार धूमधाम से पूजा की तैयारियों में जुटे हुए हैं. इस बार कृत्रिम और प्राकृतिक फूलों से माता का दरबार सजाने की तैयारी है. मंदिर परिसर में ही माता की प्रतिमा और पंडाल निर्माण कराया जायेगा. लाइट, साउंड व पंडाल के लिए कारीगर बुक किये गये हैं. पहले एक ही साथ प्रतिमा का निर्माण होता था. अब अलग-अलग देवी-देवताओं की प्रतिमा का निर्माण होने लगा है. मूर्तिकार बागमली के ही दिलीप पंडित मूर्ति बनाते रहे हैं. माता का मंडप भी फूलों से सजाया जायेगा, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र होगा. मंदिर के संचालन और दुर्गापूजा के लिए स्थानीय लोगों की कमेटी है. मंदिर का अपना कोष है. श्रद्धालु दान और चंदा के माध्यम से राशि देते हैं.

कब हुई स्थापना :

जगदंबा मंदिर की स्थापना कब और किसने की लोग ठीक से नहीं बता पाते. जनश्रुति है कि 100 से 200 वर्ष अथवा उससे पहले ही देवी की स्थापना किसी देवी भक्तों ने की थी. स्थानीय लोगों की यहां से गहरी आस्था जुड़ी है. पहले मिट्टी की पिंडी थी और मिट्टी की दीवार से ही घिरा था. बाद में स्थानीय लोगों ने आपसी सहयोग से आधुनिक स्वरूप में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया. करीब 63 वर्ष पहले स्वर्गीय जगदीश चौधरी ने ग्रामीणों के आपसी सहयोग से मंदिर में प्रतिमा स्थापित कर पूजा का शुभारंभ किया था, जो आज भी निर्बाध रूप से जारी है.

क्या है परंपरा :

जगदंबा स्थान मंदिर में नवरात्र के अष्टमी, नवमी एवं दशमी को दर्शन के लिए काफी भीड़ उमड़ पड़ती है. नवरात्र के अलावा आषाढ़ महीने में माता की विशेष पूजा होती है, जो आषाढ़ी पूजा के नाम से विख्यात है. ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से माता की आराधना करते हैं उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है. मनोकामना पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु शुक्रवार को विशेष आरती का आयोजन करते हैं. मंदिर में पिछले 24 वर्षों से प्रत्येक शुक्रवार भव्य आरती होती आ रही है.

खुले मैदान में तलवारबाजी कला का होता था प्रदर्शन

दुर्गापूजा पर आरंभ काल में खुले मैदान में तलवारबाजी की कला का प्रदर्शन होता था. देखने के लिए दूर-दूर से लोग जुटते थे. इसकी यादें आज भी लोगों के दिल में हैं. साथ ही मेला व गीत-संगीत की भी परंपरा थी. आधुनिकता के प्रभाव से अब यह परंपरा बंद हो गयी है. सदस्यों ने इस बार देवी जागरण आयोजित करने की संभावना जतायी है. पूजा कमेटी में अध्यक्ष जग नारायण सिंह, उपाध्यक्ष सुभाष कुमार निराला, सचिव रघुनाथ राय, कोषाध्यक्ष लाल देव शर्मा, सदस्य राजेश सिंह, राजू कुमार, अंशु विराट, शत्रुघ्न राय, पुरुषोत्तम सिंह, सोनू सिंह, सोनल राज, गुप्तेश्वर सिंह, राजू सिंह, विनोद राय हैं.

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