hajipur news. लगातार 200 से ऊपर रह रहा शहर का एक्यूआइ, सतर्क रहने की जरूरत

शनिवार से रविवार तक हाजीपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआइ 200 से 228 के बीच दर्ज किया गया

हाजीपुर. शहर की वायु गुणवत्ता एक बार फिर चिंता का कारण बनती जा रही है. शनिवार से रविवार तक हाजीपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआइ 200 से 228 के बीच दर्ज किया गया, जो कि ‘खराब’ श्रेणी में आता है. विशेषज्ञों के अनुसार यह स्तर आम लोगों, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है. यदि पिछले सप्ताह पर नजर डालें, तो हालात अपेक्षाकृत बेहतर थे. लगभग एक सप्ताह पहले हाजीपुर का एक्यूआइ 160 से 175 के बीच रिकॉर्ड किया गया था, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है. यानी मात्र सात दिनों के भीतर वायु प्रदूषण के स्तर में लगभग 40 से 60 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह तेज़ बढ़ोतरी साफ संकेत देती है कि शहर की हवा लगातार खराब होती जा रही है और यदि यही रफ्तार रही तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.

कचरा जलाने पर हो सख्ती

प्रदूषण में वृद्धि के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं. ठंड के मौसम में हवा की गति कम हो जाती है, जिससे धूल, धुआं और प्रदूषक कण वातावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं. इसके अलावा हाजीपुर में स्थित बड़े औद्योगिक क्षेत्र में सैकड़ों छोटे-बड़े कारखानों से निकलने वाला धुआं भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है. शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या, सड़कों के निर्माण और मरम्मत कार्य, तथा खुले में कचरा जलाना प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारक बनते जा रहे हैं. जब तक औद्योगिक प्रदूषण, वाहनों के धुएं और खुले में कचरा जलाने पर सख्ती नहीं की जाएगी, तब तक वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार संभव नहीं है.

डॉक्टरों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी सांस की बीमारियों से ग्रसित लोगों को बचने की हिदायत दी गई है. जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करने, घरों में साफ-सफाई बनाए रखने और पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है.

हालांकि राहत की बात यह है कि नगर परिषद द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. नगर क्षेत्र में एंटी-स्मॉग गन से युक्त स्प्रिंकलर मशीनों के माध्यम से नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि हवा में मौजूद धूलकणों को नियंत्रित किया जा सके.

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By Shashi Kant Kumar

Shashi Kant Kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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