हाजीपुर: राघोपुर में बाढ़ के पानी में डूबा 45 वर्षीय युवक, तीन साथी तैरकर निकले; शव की तलाश जारी

राघोपुर के फतेहपुर में बाढ़ के पानी में चार लोग डूब गए, जिनमें से तीन बच गए लेकिन एक व्यक्ति लापता है। एसडीआरएफ की टीम शव की तलाश में जुटी है।

Hajipur News : राघोपुर में बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. थाना क्षेत्र की फतेहपुर पंचायत में मंगलवार दोपहर राशन लाने जा रहे चार लोग बाढ़ के पानी में डूब गए. तीन लोग किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए, जबकि एक व्यक्ति गहरे पानी में डूब गया. लापता व्यक्ति की पहचान जुड़ावनपुर थाना क्षेत्र के पहाड़पुर पश्चिमी पंचायत के वार्ड-1 नया टोला निवासी स्वर्गीय बंगाली दास के 45 वर्षीय पुत्र अरुण दास के रूप में हुई है. घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया.

करीब तीन किलोमीटर बाढ़ का पानी पार कर जा रहे थे

बताया गया कि पूरे इलाके में बाढ़ का पानी फैला हुआ है और कई जगहों पर आवागमन के लिए नाव की सुविधा उपलब्ध नहीं है. मंगलवार दोपहर अरुण दास अपने तीन साथियों के साथ करीब तीन किलोमीटर बाढ़ का पानी पार कर फतेहपुर बाजार राशन लाने जा रहे थे.

अचानक गहरे पानी में चले गये चारों

फतेहपुर पंचायत में डिग्री के सामने पहुंचने के दौरान चारों लोग अचानक गहरे पानी में चले गये और डूबने लगे. तीन साथी किसी तरह तैरकर बाहर निकल गये, लेकिन अरुण दास गहरे पानी में चले गये और लापता हो गये. ग्रामीणों ने घटना की सूचना उनके परिजनों और पुलिस को दी.

एसडीआरएफ ने शुरू किया सर्च अभियान

सूचना मिलने के बाद राघोपुर थानाध्यक्ष अवधेश कुमार ने एसडीआरएफ टीम को मौके पर बुलाया. टीम ने बाढ़ के पानी में सर्च अभियान शुरू किया. काफी प्रयास के बावजूद देर शाम तक अरुण दास का शव बरामद नहीं हो सका था. एसडीआरएफ की टीम उनकी तलाश में जुटी रही.

चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

अरुण दास के परिवार में तीन पुत्र गोलू कुमार, प्रिंस कुमार और पीयूष कुमार के अलावा एक पुत्री है. हादसे के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. पिता के लापता होने से बच्चों और परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.

नाव की व्यवस्था नहीं होने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप

घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाया है. ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ प्रभावित इलाके में लोगों के आवागमन के लिए पर्याप्त नाव की व्यवस्था नहीं की गयी है. उनका कहना है कि नाव की सुविधा होती तो लोगों को जान जोखिम में डालकर बाढ़ का पानी पार करने की मजबूरी नहीं होती.

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By अभिषेक शाश्वत

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