बिदुपुर. राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, वैशाली में आइआइटी रुड़की के आइहब दिव्यसंपर्क के विशेषज्ञों ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग और एज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दस दिवसीय प्लेसमेंट प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की. कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए संस्थान के प्राचार्य डॉ अनंत कुमार ने बताया कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के निर्देशन में इस कार्यशाला का आयोजन बीटेक छात्र-छात्राओं की नियोजन दर बढ़ाने के उद्देश्य से आइआइटी रुड़की के सहयोग से किया गया है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में उद्योग जगत की मांग को ध्यान में रखते हुए इस तरह के कार्यक्रम शैक्षणिक संस्थानों और इंडस्ट्री के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. प्राचार्य ने विद्यार्थियों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग और एज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नवीनतम तकनीकों को सीखने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स विभिन्न उद्योगों में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है. हैंड्स ऑन ट्रेनिंग के माध्यम से कार्यक्रम की रूपरेखा को समझाया कार्यशाला के दौरान उद्योग जगत के विशेषज्ञ राजर्षि शर्मा, कौशलेंद्र सिंह सिसोदिया और अभिषेक कुमार शुक्ल ने हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के माध्यम से कार्यक्रम की रूपरेखा को समझाया और छात्रों को नई तकनीकों को सीखने के लिए प्रेरित किया. कार्यक्रम के कोऑर्डिनेटर और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर पंकज कुमार ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल 40 घंटे का होगा, जिसमें विभिन्न सेमेस्टर और शाखाओं के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं. प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा, जिससे वे मल्टीनेशनल कंपनियों में बेहतर नियोजन के लिए खुद को तैयार कर सकेंगे. बताया गया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऑटोमैटिक स्ट्रीट लाइट ऑन-ऑफ सिस्टम, दूरी मापन, अल्ट्रासोनिक सेंसर, वायु शुद्धता मापन और ऑटोमैटिक इरिगेशन सिस्टम जैसे प्रोजेक्ट के माध्यम से रोजमर्रा के कार्यों को सुलभ बनाने में सक्षम बनाना है.
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