गंगा-गंडक का जलस्तर घटने लगा, लेकिन अभी टला नहीं बाढ़ का खतरा; इन इलाकों में बढ़ी परेशानी

हाजीपुर में गंगा और गंडक नदी का जलस्तर घटने से लोगों ने राहत की सांस ली है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार नजर बनाए हुए है और मदद पहुंचा रहा है।

Hajipur News: वैशाली जिले से होकर बहने वाली गंगा और गंडक नदी के जलस्तर में रविवार से गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे बाढ़ प्रभावित लोगों ने बड़ी राहत महसूस की है. जल संसाधन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रविवार की सुबह की अपेक्षा शाम के समय दोनों नदियों के जलस्तर में करीब 0.05 मीटर की कमी दर्ज की गई. लालगंज में गंडक नदी का जलस्तर सुबह 6 बजे 51.61 मीटर से घटकर शाम 6 बजे 51.57 मीटर रह गया, जबकि हाजीपुर में यह 50.59 मीटर से कम होकर 50.53 मीटर दर्ज किया गया. इसी तरह गंगा नदी का जलस्तर भी सुबह 50.57 मीटर से घटकर शाम में 50.51 मीटर पर आ गया.

धीमी रफ्तार से उतर रहा पानी, राहत की उम्मीदें बढ़ीं

विभागीय आंकड़ों और जानकारों के अनुसार हाजीपुर क्षेत्र में दोनों नदियों का जलस्तर लगभग 0.5 एमएम प्रति घंटे की रफ्तार से नीचे खिसक रहा है. हालांकि यह गिरावट धीमी है, लेकिन उफनती नदियों के शांत पड़ने से तटवर्ती इलाकों और दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को जल्द ही बाढ़ की विभीषिका से निजात मिलने की संभावना बढ़ गई है. कई दिनों से लगातार बढ़ रहे जलस्तर के रुकने और घटने से स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों दोनों ने थोड़ी राहत की सांस ली है.

बाढ़ के पानी के बीच से गुजरती महिलायें | Prabhat Khabar Network

बांध क्षतिग्रस्त होने से कई इलाकों में अब भी गंभीर जलजमाव

नदियों के जलस्तर में कमी आने के बावजूद बाढ़ प्रभावितों की जमीनी मुश्किलें फिलहाल कम नहीं हुई हैं. गंडक नदी का सुरक्षा बांध क्षतिग्रस्त हो जाने के चलते हाजीपुर के अकिलाबाद, मीनापुर राई, कौनहारा घाट, लोदीपुर और दियारा क्षेत्र के रिहायशी इलाकों में पानी का भारी दबाव अब भी बना हुआ है. शहरी व उपनगरीय इलाकों में स्थिति यह है कि डीआरसीसी जाने वाली मुख्य सड़क और रामभद्र मोहल्ले में कई फीट पानी भरा हुआ है, जिससे स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है.

डीआरसीसी जाने वाली सड़क पर नव से आते जाते लोग | Prabhat Khabar Network

हजारों एकड़ फसल बर्बाद, पशुपालकों के सामने चारे का गंभीर संकट

बाढ़ का पानी नए-नए रिहायशी और कृषि योग्य क्षेत्रों में प्रवेश कर जाने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है और हजारों एकड़ में लगी मौसमी फसलें पूरी तरह डूबकर नष्ट हो चुकी हैं. इस आपदा के कारण सबसे विषम स्थिति पशुपालकों के सामने उत्पन्न हो गई है, जिन्हें मवेशियों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने और उनके लिए सूखे व हरे चारे का प्रबंध करने में भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण महिलाएं और बच्चे भी घुटने से लेकर कमर तक भरे गंदे पानी के बीच से रोजमर्रा की जरूरतों के लिए निकलने को मजबूर हैं.


पशु लेकर जाता बच्चा | Prabhat Khabar Network

प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक निगरानी तेज, राहत सामग्री वितरण जारी

बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए वैशाली जिला प्रशासन ने सभी प्रभावित अंचलों में पैनी नजर बनाए रखी है. जिलाधिकारी के निर्देश पर विशेष रूप से अत्यधिक प्रभावित राघोपुर, महनार और सहदेई बुजुर्ग प्रखंडों में प्रशासनिक राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं. जलमग्न टोलों में लोगों के आवागमन के लिए पर्याप्त सरकारी नावें लगाई गई हैं, जबकि विस्थापितों के भोजन के लिए जगह-जगह सामुदायिक रसोइयों का संचालन किया जा रहा है. साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें जलजनित बीमारियों की रोकथाम में जुटी हैं और पशुपालन विभाग द्वारा चारे की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. प्रशासन ने लोगों से गहरे पानी वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की है.

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By गोपाल कुमार राय

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