Ganga river water level: गंगा एवं गंडक नदी का जलस्तर घटने के बाद भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है. कई क्षेत्रों में अब भी घरों में चार से पांच फीट तक पानी जमा है. प्रशासन की ओर से बनाये गये राहत शिविरों में लोग किसी तरह समय गुजार रहे हैं, लेकिन बाढ़ पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी चुनौती घर और उसमें रखे सामान की सुरक्षा की है. लोग पानी के बीच से घरों में आ-जा कर सामान की रखवाली कर रहे हैं. कई इलाकों में अधिक पानी जमा होने के कारण बिजली आपूर्ति भी पूरी तरह ठप है, जिससे रात के समय घरों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो गया है.
नदी के जलस्तर में तेजी से हो रही कमी
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले दो दिनों से गंगा और गंडक नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है. सोमवार की शाम छह बजे की रिपोर्ट के अनुसार हाजीपुर और लालगंज में गंडक नदी के जलस्तर में पांच एमएम प्रति घंटा की कमी दर्ज की गयी. वहीं गंगा नदी के जलस्तर में 4.16 एमएम प्रति घंटा की रफ्तार से कमी रिकॉर्ड की गयी.
इसके बावजूद हाजीपुर में गंडक नदी खतरे के निशान से 0.09 मीटर ऊपर बह रही है. लालगंज में गंडक का जलस्तर लाल निशान से 0.97 मीटर ऊपर है. वहीं गंगा नदी भी खतरे के निशान से 1.76 मीटर ऊपर बह रही है. ऐसे में जलस्तर में कमी के बावजूद बाढ़ प्रभावित लोगों को अभी पूरी राहत नहीं मिली है.
जहरीले सांप और कीड़ों का सता रहा भय
बाढ़ प्रभावित रेखा देवी, मालती कुमारी, महेश साह और रत्नेश कुमार आदि ने बताया कि घरों में पानी भरने के कारण रात के अंधेरे में जहरीले सांप और अन्य कीड़ों का भय बना रहता है. सबसे अधिक चिंता छोटे बच्चों को लेकर है. पानी में डूबे घरों और उनमें रखे सामान की सुरक्षा करना भी मुश्किल हो रहा है.
हाजीपुर के तेरसिया, दियारा, कौनहारा घाट क्षेत्र के साथ महनार की आधा दर्जन से अधिक पंचायतों और सहदेई प्रखंड की कई पंचायतों के लोगों के लिए बाढ़ का पानी परेशानी का कारण बना हुआ है.
राघोपुर में पशुपालकों की बढ़ी परेशानी
बाढ़ के कारण राघोपुर प्रखंड की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है. चारों तरफ से नदियों से घिरे इस इलाके में लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. सबसे बड़ी परेशानी पशुओं के लिए चारा जुटाने में हो रही है.
प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों के लिए पशुचारा उपलब्ध कराया गया है, लेकिन हरे चारे की व्यवस्था के लिए पशुपालकों को जोखिम उठाना पड़ रहा है. राघोपुर के पशुपालक हरे राम सिंह, विंदेश्वर सिंह आदि ने बताया कि पशुओं को हरा चारा नहीं मिलने से दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है. दूध उत्पादन में कमी के कारण पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है.
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