Vaishali Flood Update : महनार प्रखंड क्षेत्र के चमरहरा जगदीश उच्च विद्यालय में संचालित स्थायी बाढ़ राहत शरण स्थल सह सामुदायिक रसोई में बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन, आवासन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. बच्चों के लिए दूध-बिस्कुट और पशुओं के लिए चारा भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है. शिविर में रह रहे बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन की ओर से की गयी व्यवस्था पर संतोष जताया, हालांकि उन्होंने भोजन में रोटी, बेहतर बिछावन और पर्याप्त पशु चारा उपलब्ध कराने की मांग रखी.
सुबह-शाम मिल रहा चावल, दाल और सब्जी
शिविर में रह रहे बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि सुबह और शाम दो समय चावल, दाल और सब्जी दी जा रही है. समय-समय पर चिकित्सकों की टीम पहुंचकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रही है और जरूरत के अनुसार दवाएं भी उपलब्ध करायी जा रही हैं. नवजात और छोटे बच्चों के लिए दूध तथा बच्चों के बीच बिस्कुट का वितरण किया जा रहा है. पशुओं की स्वास्थ्य जांच के साथ उनके लिए चारा उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गयी है.
बुजुर्ग बोले- लगातार चावल खाने से हो रही परेशानी
शिविर में रहने वाले अधिकांश बाढ़ पीड़ित राघोपुर प्रखंड की चकसिंगार पंचायत के शिवनगर लंका टोला के निवासी हैं. 75 वर्षीय सकलदीप राम ने बताया कि सुबह-शाम लगातार चावल खाने से उन्हें परेशानी हो रही है. उन्होंने प्रशासन से कम से कम एक समय रोटी उपलब्ध कराने की मांग की. उनका कहना था कि बुजुर्ग और बीमार लोगों के लिए लगातार चावल खाना सुविधाजनक नहीं है.
चावल से परेशान होकर रिश्तेदार के घर चले गए हनुमान पासवान
चकचान गांव निवासी हनुमान पासवान ने बताया कि लगातार चावल मिलने के कारण वह शिविर छोड़कर रिश्तेदार के यहां चले गए. उन्होंने कहा कि यदि भोजन में चावल के साथ रोटी की भी व्यवस्था हो, तो बाढ़ पीड़ितों को काफी सुविधा होगी.
जमीन पर सोने की समस्या भी उठी
शिविर में रह रही कुछ महिलाओं ने बिछावन की समस्या सामने रखी. महिलाओं ने बताया कि फिलहाल उन्हें जमीन पर सोना पड़ रहा है. स्कूल में बेंच उपलब्ध हैं, लेकिन छोटे बच्चों के साथ बेंच पर सोना सुरक्षित नहीं है और बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है. महिलाओं ने दरी, बिछावन और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की.
आठ मवेशियों के साथ तीन दिन से शिविर में, एक दिन मिला चारा
मवेशियों के साथ शिविर में रह रहे पशुपालकों के सामने चारे की समस्या भी बनी हुई है. दहाउड़ राय ने बताया कि वह पिछले तीन दिनों से आठ मवेशियों के साथ शिविर में रह रहे हैं. उनके अनुसार, तीन दिनों में केवल एक दिन ही चारा मिला है. पर्याप्त चारा नहीं मिलने के कारण उन्हें मवेशियों को पेट भराने के लिए आसपास के क्षेत्रों में ले जाना पड़ रहा है. बाढ़ के बीच पशुओं को लेकर बाहर जाना उनके लिए परेशानी और जोखिम का कारण बन रहा है.
शिकायत मिलते ही एसडीओ ने कराया दरी और तकिया का इंतजाम
बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं की जानकारी महनार एसडीओ अंकित कुमार के संज्ञान में पहुंचते ही प्रशासन ने तत्काल पहल की. एसडीओ के निर्देश पर राहत शिविर में दरी, सफेदा और तकिया की व्यवस्था करायी गयी. वहीं मेडिकल कैंप में तैनात चिकित्सक द्वारा मरीजों की जांच के बाद चिकित्सकीय सलाह के आधार पर बीमार मरीजों को रोटी उपलब्ध कराने का निर्देश सामुदायिक रसोई संचालक को दिया गया.
नियमित निरीक्षण कर रहे अधिकारी
बाढ़ पीड़ितों ने कहा कि बाढ़ के कारण घर छोड़कर राहत शिविर में रहना उनकी मजबूरी है. ऐसे में भोजन, चिकित्सा, बच्चों के लिए दूध-बिस्कुट और पशुओं की स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं उनके लिए बड़ी राहत हैं. पीड़ितों ने उम्मीद जतायी कि भोजन में रोटी, पर्याप्त बिछावन और नियमित पशु चारा मिलने से बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और पशुपालकों की परेशानी और कम होगी.
महनार एसडीओ अंकित कुमार, बीडीओ मुकेश कुमार और सीओ पूजा राय समय-समय पर राहत आश्रय स्थल का निरीक्षण कर बाढ़ पीड़ितों का हाल जान रहे हैं और व्यवस्थाओं की जानकारी ले रहे हैं.
