गंडक की रेत पर कई एकड़ में लगी फसल को प्रशासन ने हटाया

एनजीटी के नियमों का दिया हवाला, किसानों की शिकायत पर पहुंचे विधायक

हाजीपुर. गंडक नदी के रेत पर पिछले कई दशकों से किसान तरबूज, खीरा और ककड़ी की खेती करते आ रहे हैं. हाजीपुर से लेकर जिले की सीमा वैशाली प्रखंड तक गंडक नदी के बीच निकले हजारों एकड़ पर खेती होती है. लेकिन, शुक्रवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के नियमों का हवाला देते हुए प्रशासन ने कई एकड़ की खेती को उजाड़ दिया. सूचना पर शनिवार के दिन स्थानीय विधायक किसानों के बीच पहुंचे. इस दौरान इन्होंने किसानों द्वारा बिना रसायन वाले खाद के प्रयोग की जानकारी दी और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की.

इस संंबंध में नखास के रहने वाले पंकज सहनी ने बताया कि गंडक नदी के रेत पर पिछले कई दशकों से किसान यहां खेती करते आ रहे हैं. जैसे-जैसे रेत निकलता है, वैसे-वैसे लोग उसकी घेराबंदी कर खुद में इलाका बांट कर उस पर खेती करते हैं. इस सीजन के लिए किसानों ने खेत में तरबूज, ककड़ी एवं खीरा की रोपनी शुरू कर दी थी. इसी दौरान शुक्रवार के दिन अचानक प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और पौधों को मिट्टी से ढंकना शुरू कर दिया. कई पौधों को उखाड़ लिया गया. प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिसकर्मी एवं मजदूर खेत को उजाड़ना शुरू कर दिया. वहीं, पौधों को सहारा देने के लिये लगाये गये झलसी को इकट्ठा करके आग लगा दी गयी. ये कार्रवाई पुरानी गंडक पुल के आसपास और डीएम आवास के सामने की गयी. स्थानीय राकेश सहनी, किशोरी सहनी, सुजीत सहनी आदि की फसल बर्बाद कर दी गयी.

परंपरागत खेती जारी रहेगी

गंडक नदी की रेत पर खेती उजाड़ने की सूचना पर हाजीपुर विधायक तंगौल घाट पहुंचे. वहां पर सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद थे. विधायक खेती वाले स्थान पर भी गये. इस दौरान इन्होंने कहा कि यह खेती किसानों की आय का मुख्य स्रोत है तथा क्षेत्र की कृषि परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. हाल ही में कुछ किसानों से सूचना मिली थी कि जिला प्रशासन के निर्देश पर उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे किसान समुदाय में असंतोष व्याप्त था. विधायक ने किसानों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना तथा उन्हें पूरा आश्वासन दिया कि किसानों द्वारा की जा रही खेती पूरी तरह रासायनिक खाद मुक्त एवं परंपरागत तरीके से ही जारी रहेगी. आगे से जिला प्रशासन द्वारा खेती में किसी प्रकार की रोक-टोक या फसल नुकसान नहीं किया जायेगा. किसानों के हितों की पूर्ण रक्षा सुनिश्चित की जायेगी.

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