Hajipur News: लालागंज प्रखंड क्षेत्र के शीतल भकुरहर गांव में बुधवार को भाकपा-माले कार्यकर्ताओं ने पार्टी के संस्थापक चारु मजूमदार का 54वां शहादत दिवस मनाया. इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
झंडोत्तोलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत भाकपा-माले के जिला कमेटी सदस्य राम पारस भारती द्वारा झंडोत्तोलन से हुई. इसके बाद चारु मजूमदार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. बड़ी संख्या में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने उनके योगदान को याद किया.
जीवन और संघर्ष पर डाला प्रकाश
राम पारस भारती ने अपने संबोधन में चारु मजूमदार के जीवन और राजनीतिक संघर्षों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि चारु मजूमदार का जन्म 15 मई 1918 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक जमींदार परिवार में हुआ था. उनके पिता वीरेश्वर मजूमदार पेशे से शिक्षक थे.
उन्होंने कहा कि चारु मजूमदार ने संपन्न पारिवारिक जीवन छोड़कर संघर्ष और क्रांतिकारी राजनीति का रास्ता चुना. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वे कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े और बाद में नक्सलवादी आंदोलन के प्रमुख नेता बने.
शहादत दिवस पर किया स्मरण
राम पारस भारती ने कहा कि 28 जुलाई 1972 को कोलकाता के लालबाजार थाना में चारु मजूमदार की मृत्यु हुई थी. कार्यकर्ताओं ने उन्हें याद करते हुए उनके विचारों और संघर्षों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
श्रद्धांजलि सभा में हरेंद्र राम, बब्लू अंबेडकर, रामजी राम, दिनेश राय, सरफुद्दीन मियां, विमल ठाकुर, महेश राम, रामचंद्र मांझी, उपेंद्र मांझी, श्यामजी राय, जवाहर राय, संजय कुमार दास, शिव कालों देवी, रंजू देवी, सरस्वती देवी, चंद्री देवी, भगवानिया देवी, शैल कुमारी देवी, मिनचू देवी, सीता देवी, ऊषा देवी, लीलम देवी, सुशीला देवी, कांति देवी, खुशबू कुमारी, सोनी देवी, रेनू देवी, मुनिया देवी सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे.
