Bihar News: जब्त कार का इस्तेमाल करना थानाध्यक्ष को पड़ा महंगा, अदालत ने लगाया 1 लाख का जुर्माना

Bihar News: बिहार के गोपालगंज जिले के जादोपुर थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष को जब्त किए गए SUV का निजी इस्तेमाल करना काफी महंगा पड़ गया. पटना हाई कोर्ट ने मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है.

Bihar News: पटना हाई कोर्ट के जज पीबी बजंतरी और जज सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने यूपी के बेकरी कारोबारी की एक्सयूवी 700 कार का निजी प्रयोग करने और गड़बड़ी के मामले को गंभीरता से लेते हुए जादोपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष पिंटु कुमार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने आदेश पारित होने के एक हफ्ते के भीतर याचिकाकर्ता की गाड़ी सही सलामत लौटाने का आदेश सरकार को दिया है.

कैसे हुआ साबित

हर्ष अग्रवाल द्वारा सिविल रिट याचिका सं-16507/2024 दायर कर उनकी गाड़ी में लगा जीपीएस का डेटा न्यायालय को दिखाया गया, जिससे साबित हुआ कि 25 जुलाई, 24 को जब्त करने बाद से ही थानाध्यक्ष पिंटू कार का निजी इस्तेमाल कर रहा था.

बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें

कांटी में जब्त कर पुलिस ने बंगरी में दिखा दिया

अधिवक्ता कुमार हर्षवर्धन ने कोर्ट को बताया कि पीड़ित यूपी के कुशीनगर के पड़रौना शहर के तुलसी आवास में रहने वाले हर्ष अग्रवाल हैं. उनके पिता सुमित अग्रवाल कारोबार के सिलसिले में 24 जुलाई, 2024 को दरभंगा से लौट रहे थे. मुजफ्फरपुर के कोटी के पास सादे वेश में दो लोगों ने एक्सयूवी कार को रोक कर उनको उतार दिया. गाड़ी रात थी. के 10 बजे जादोपुर थाने में खड़ी जादोपुर के थानेदार पिंटु कुमार ने 25 जुलाई को रात में तीन बजे एक झूठी कहानी रच कर बंगरी मोड़ से दो शराबियों को अरेस्ट दिखाकर कार से 90 लीटर शराब जब्त करने का केस थाने में दर्ज किया. जीपीएस में स्पष्ट है कि रात के 10 बजे से ही थाने में कार खड़ी थी. अधिवक्ता ने बताया कि सुमित की कार को शराब के साथ जब्त करने की प्राथमिकी दर्ज होने पर वे टेंशन में रहने लगे और दिसंबर 2024 में उनका निधन हो गया.

इसे भी पढ़ें: कैमूर में बनारस-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के लिए दोगुने रेट पर होगा जमीन का अधिग्रहण, डीएम ने दिया बड़ा अपडेट

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >