पुष्प वाटिका में राम-सीता के मिलन का वर्णन सुन भावविभोर हुए श्रोता

बरौली. ‘लोचन मग रामहि उर आनी, दीन्हे पलक कपाट सयानी,’ ’जब सिय सखिन्ह प्रेमबस जानी, कहि न सकहिं कछु मन सकुचानी.’ अर्थात नेत्रों के रास्ते श्री राम को हृदय में लाकर जानकी जी ने पलकों के किवाड़ लगा दिये.

बरौली. ‘लोचन मग रामहि उर आनी, दीन्हे पलक कपाट सयानी,’ ’जब सिय सखिन्ह प्रेमबस जानी, कहि न सकहिं कछु मन सकुचानी.’ अर्थात नेत्रों के रास्ते श्री राम को हृदय में लाकर जानकी जी ने पलकों के किवाड़ लगा दिये. जब सखियों ने सीता के मन का हाल जाना, तब वे मन में सकुचा गयीं. महोत्सव के छठे दिन नगर पर्षद के ब्लॉक के पीछे स्थित सुप्रसिद्ध डाक बाबू के शिव मंदिर पर चल रहे सात दिवसीय शिव पार्वती व श्रीराम-सीता विवाह महोत्सव में प्रवचन के दौरान आचार्य बाल वैरागी महाराज ने भगवान राम और सीता के पुष्प वाटिका में प्रथम दर्शन का मनोहारी चित्रण किया, तो श्रोता वाह-वाह कर उठे. ज्ञान मंच के उद्घाटन के बाद विद्वान ने कहा कि गुरु और माता के आदेश से राम और सीता पुष्प वाटिका में पुष्प लेने जाते हैं, जहां दोनों के परस्पर दर्शन होता है और दोनों के अंतर्मन में एक-दूसरे के प्रति प्रेम की कोपलें फूट पड़ती हैं. दोनों एक-दूसरे को अपलक देखते रह जाते हैं और अपना सुध-बुध खो बैठते हैं. सखियों ने जब सीता की प्रेम की परिस्थिति देखी, तो वे भयभीत हो गयी और कहने लगीं कि बड़ी देर हो गयी. कल फिर आयेंगे, अब चलना चाहिए. सखियों की बात सुन सीता ने काफी धीरज से काम लिया और श्रीराम को अपने हृदय में लाकर ध्यान करते हुए अपने को पिता के अधीन जान कर वापस लौट पड़ी. विदुषी ने कहा कि पुष्प वाटिका में राम-सीता के प्रथम दर्शन वस्तुतः शील और सौंदर्य का अनुपम मिलन है. दोनों की शोभा और सौंदर्य का वर्णन करने के लिए शब्द कम पड़ जायेंगे. महोत्सव का समापन आज राम-सीता के विवाह के बाद हो जायेगा. महोत्सव को सफल बनाने में क्षेत्र के दर्जनों भक्त लगे हैं.

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Author: SANJAY TIWARI

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