Gopalganj News: ‘गुरु-गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय, बलिहारी गुरु आपकी, गोविंद दियो बताय’ की महिमा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जिलेभर में गूंजती रही. गुरुकुलों, मठों और शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. शिष्यों ने गुरु चरणों में वंदना कर आशीर्वाद लिया और अपने जीवन में गुरु के मार्गदर्शन को सर्वोपरि बताया.
सूर्योदय के साथ ही श्रद्धालुओं ने स्नान कर गुरु पीठों पर पहुंचकर पूजन-अर्चन किया. विभिन्न मठों में गुरु चरणों की पूजा कर शिष्यों ने आशीर्वाद ग्रहण किया. जिले के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दिनभर भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता रहा.
पकड़ीयार मंदिर में शिष्यों ने गुरु चरणों में नवाया शीश
कुचायकोट प्रखंड के पकड़ीयार मंदिर में हर वर्ष की तरह इस बार भी गुरु पूर्णिमा पर भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ. यहां संत शिरोमणि अनंत श्री से विभूषित स्वामी विशंभर दास जी महाराज के चरणों में शीश नवाने के लिए शिष्यों की कतार लगी रही.
स्वामी विशंभर दास जी महाराज ने कहा कि गुरु की महिमा अत्यंत व्यापक है. जब साधक साधना के मार्ग से विचलित होता है और उसके मन में गलत विचार आने लगते हैं, तब गुरु का मार्गदर्शन ही उसे सत्य की ओर ले जाता है. गुरु ही जीवन के अंधकार को दूर कर प्रकाश का मार्ग दिखाते हैं.
पीएचडी पूरी करने के बाद गुरु से लिया आशीर्वाद
कुचायकोट प्रखंड के भठवां गांव निवासी डॉ. अमित तिवारी ने पीएचडी पूरी करने के बाद अपने गुरु बीएचयू के प्रो. डॉ. शंकर मिश्र के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद लिया. गुरु पूर्णिमा पर उन्होंने गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की.
गायत्री मंदिर में हवन और दीप यज्ञ का आयोजन
शहर के गायत्री मंदिर में सुबह आठ बजे हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया. इसके बाद 11 बजे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. शाम को दीप यज्ञ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ. कार्यक्रम को सफल बनाने में सत्येंद्र कुमार वर्मा, शिवबच्चन प्रसाद, अरविंद कुमार सुमन, अरुण गुप्ता, प्रेम केडिया, प्रबंधकारी में रवींद्र कुमार और सुनील कुमार रौनियार सहित अन्य लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
बरौली स्थित प्रेमनगर आश्रम में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हजारों शिष्य गुरु भक्ति में लीन नजर आये. पूरे क्षेत्र में गुरु की महिमा के भजन गूंजते रहे. प्रसिद्ध प्रेमनगर आश्रम गुरुभक्ति की पावन सरिता में डूबा रहा. यहां बिहार समेत कई राज्यों और नेपाल से भी शिष्य गुरु वंदना के लिए पहुंचे.
श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी अधिक रही कि कई एकड़ में फैला आश्रम का मैदान भी छोटा पड़ गया. शिष्यों के पहुंचने का सिलसिला कई दिन पहले से ही शुरू हो गया था.
प्रेमनगर आश्रम के वर्तमान गुरु स्वामी निजानंद महाराज ने बताया कि चारों वेदों और महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म गुरु पूर्णिमा के दिन ही हुआ था. इस दिन शिष्य विधिवत गुरु की पूजा और वंदना करते हैं.
उन्होंने गुरु के महत्व को बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाये, वही गुरु है.
ब्रह्मलीन संतों को नमन कर शिष्यों ने की गुरु वंदना
प्रेमनगर आश्रम में शिष्यों ने सबसे पहले ब्रह्मलीन गुरु आत्मानंद जी परमहंस की आदमकद प्रतिमा को नमन किया. इसके बाद ब्रह्मलीन स्वामी नित्यानंद जी और स्वामी स्वरूपानंद जी का चरण वंदन किया और पूरे दिन भक्ति में लीन रहे.
व्यास महात्म साह ने अपने साथियों के साथ गुरु भक्ति के गीत प्रस्तुत किये. आसपास के गांवों और अन्य स्थानों से पहुंचे शिष्य दिनभर प्रसाद ग्रहण करते रहे.
आश्रम की व्यवस्था संभालने में शिष्य नगनारायण सिंह, गणेश सिंह, योगेंद्र उपाध्याय, शिवेंद्र सिंह, राजेश्वर सहनी, अक्षयलाल सोनी, पूर्व मुखिया राधाकिशुन चौधरी, कृष्णा बैठा, चिरंजीवी सिंह सहित दर्जनों शिष्य जुटे रहे.
