Gopalganj news : (प्रशांत पाठक की रिपोर्ट)
आज के डिजिटल युग में जहां तकनीक हमारे जीवन को सुगम बना रही है, वहीं साइबर अपराधी भी ठगी के नए-नए और बेहद चौंकाने वाले तरीके ईजाद कर रहे हैं. हाल के दिनों में ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में एक नया चलन देखने को मिला है. पुराने, टूटे-फूटे मोबाइल के बदले सामान का वितरण. सुनने में यह एक फायदे का सौदा लग सकता है कि घर में पड़ा कचरा आपको एक नया कंबल, बर्तन या नारियल दिला रहा है. लेकिन इसके पीछे छिपा खतरा आपकी जिंदगी भर की कमाई और निजता को दांव पर लगा सकता है.
फेरीवाला बनकर पुराना मोबाइल लेकर कंबल या नारियल देते हैं
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज पुलिस द्वारा किए गए हालिया खुलासे ने इस पूरे सिंडिकेट की पोल खोल कर रख दी है. फेरीवालों के भेष में डाटा के शिकारी पिछले कुछ महीनों से बिहार और उत्तर प्रदेश के गांवों में साइकिल और मोटरसाइकिल पर सवार फेरीवालों की संख्या बढ़ गई है. ये लोग गांव-गांव घूमकर आवाज लगाते हैं पुराना मोबाइल लाओ और नया कंबल या नारियल ले जाओ.
ग्रामीण क्षेत्रों के सीधे-साधे लोग, जो अक्सर यह समझते हैं कि बंद पड़ा या स्क्रीन टूटा हुआ मोबाइल अब किसी काम का नहीं है. वे इसे खुशी-खुशी इन फेरीवालों को दे देते हैं. उन्हें लगता है कि एक बेकार पड़ी चीज के बदले घर के लिए उपयोगी सामान मिल रहा है. लेकिन असल खेल मोबाइल की उस ‘बॉडी’ का नहीं, बल्कि उसके अंदर छिपे मदरबोर्ड और चिप का है.
मदरबोर्ड से हो रही डाटा की चोरी
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि ये फेरीवाले मात्र एक जरिया हैं. ये लोग उन पुराने मोबाइलों को इकट्ठा कर एक बड़े सिंडिकेट तक पहुंचाते है. जिसके बाद सब ख़ेल शुरू हो जाता है.
डाटा रिकवरी का खेल
भले ही आपने फोन को ‘फॉर्मेट’ कर दिया हो या वह चालू हालत में न हो, मोबाइल का मदरबोर्ड और स्टोरेज चिप अक्सर सुरक्षित रहता है. साइबर अपराधी उन्नत सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर टूल्स का उपयोग करके इन चिप्स से डाटा रिकवर कर लेते हैं.
आपके पुराने फोन में छिपी आपकी निजी तस्वीरें, वीडियो, बैंक के मैसेज, आधार कार्ड की फोटो, पैन कार्ड की जानकारी और पुराने पासवर्ड्स इन अपराधियों के हाथ लग जाते हैं.
मोबाइल के पुराने डाटा को रिकवर कर बेच देते हैं
जब आपका पुराना फोन इन अपराधियों के ‘लैब’ में पहुंचता है, तो वे इन तरीकों से आपको नुकसान पहुंचाते हैं. रिकवर किए गए डाटा से आपके बैंक खातों की जानकारी और मोबाइल बैंकिंग के सुराग मिल जाते हैं. इसके बाद आपके खाते से पैसे उड़ाना उनके लिए बाएं हाथ का खेल बन जाता है. फोन की गैलरी से आपकी निजी तस्वीरें और वीडियो निकालकर अपराधी आपको या आपके परिवार को ब्लैकमेल करना शुरू करते हैं. लोक-लाज के डर से कई लोग चुपचाप पैसे दे देते हैं.
फेक आईडी बनाकर करते हैं ब्लैंकमेलिंग
आपके फोन में मौजूद आधार और पैन कार्ड की प्रतियों का उपयोग करके अपराधी फर्जी सिम कार्ड लेते हैं या फर्जी बैंक खाते खोलते हैं, जिनका उपयोग अन्य बड़े अपराधों में किया जाता है. इसमें फंसते आप हैं, क्योंकि दस्तावेज आपके होते हैं. डार्क वेब पर इस तरह के पर्सनल डाटा की भारी मांग है. आपका पूरा डिजिटल प्रोफाइल चंद रुपयों के लालच में अपराधियों को बेच दिया जाता है.
क्या है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले की पुलिस ने परतावल क्षेत्र से इस रैकेट का पर्दाफाश किया है. पुलिस की जांच में पता चला कि ये अपराधी पेशेवर तरीके से काम कर रहे थे. पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि मोबाइल के बदले सामान देने का लालच सिर्फ इसलिए दिया जाता है ताकि लोग बिना किसी हिचकिचाहट के अपना फोन सौंप दें.
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