gopalganj news : बस स्टैंड व वीएम फील्ड में सड़ गये चलंत शौचालय, ऑडिटरों ने पाया “15.20 लाख का फ्रॉड

gopalganj news : महादलित बस्तियों के नाम पर 22.80 लाख में खरीदे गये थे छह चलंत शौचालय10 सीटर चलंत शौचालय की जगह नगर परिषद ने छह सीटर के लिए ही प्रकाशित की निविदाएक हजार लीटर की जगह पांच सौ लीटर की टंकी वाले शौचालय की हुई सप्लाइ

gopalganj news : गोपालगंज. नगर परिषद ने सरकारी राशि की जमकर बंदरबांट की है. जहां हाथ डालेंगे, वहीं फर्जीवाड़ा व घोटाला सामने आ रहा है. यह हम नहीं महालेखागार पटना की ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा हुआ है. दलित बस्तियों के नाम पर खरीदे गये चलंत में भी फ्रॉड किये गये हैं.

चलंत शौचालय आज भी वीएम इंटर कॉलेज व बस स्टैंड में सड़ रहे हैं. ऑडिटरों की टीम ने पाया कि नगर परिषद द्वारा कुल छह चलंत शौचालयों का क्रय जेम पोर्टल के माध्यम से ””””रुद्रा इंटरप्राइजेज”””” से किया गया. इसके लिए एसबीएम मदर-चाइल्ड अकाउंट से नवंबर 2019 एवं जनवरी 2020 में कुल 22.80 लाख रुपये का भुगतान किया गया. ऑडिटरों की टीम ने नगर परिषद के कर्मचारियों के साथ संयुक्त भौतिक निरीक्षण में पाया कि वार्ड संख्या 26 स्थित वीएम मैदान में रखा गया एक चलंत शौचालय, जिसका टायर पूरी तरह क्षतिग्रस्त था. चारों ओर पैनलों में जंग लगी हुई थी और शौचालय पूरी तरह परित्यक्त अवस्था में पाया गया. ऐसा प्रतीत होता था कि इसका कभी उपयोग ही नहीं हुआ. इसमें 500 लीटर क्षमता की पानी की टंकी पायी गयी, परंतु शौचालय के अंदर नल नहीं था.

बस स्टैंड परिसर में तीन चलंत शौचालय पाये गये, जो पूरी तरह परित्यक्त अवस्था में थे. इनमें बेसिन का पाइप नहीं था. एक शौचालय की पानी की टंकी पूरी तरह क्षतिग्रस्त थी. तीनों शौचालयों में ऊपर चढ़ने के लिए सीढ़ी नहीं थी तथा एक में रैंप भी नहीं पाया गया. इन चारों चलंत शौचालयों के क्रय पर कुल 15.20 लाख रुपये का व्यय किया गया था. ऑडिटरों ने माना कि जिस उद्देश्य से इन शौचालयों का क्रय किया गया था, वह पूर्णतः विफल रहा. साथ ही, इस पर किया गया 15.20 लाख का व्यय निरर्थक सिद्ध हुआ. इसके अतिरिक्त, वार्ड संख्या 28 के वे छह स्थल, जहां जनता की सुविधा के लिए इन शौचालयों का क्रय किया गया था, वे भी इस सुविधा से वंचित रह गये. इससे खुले में शौच की स्थिति बनी रही और ओडीएफ व्यवस्था भी प्रभावित हुई.

ऑडिटरों ने जांच में पायीं अनियमितताएं

10 सीटर चलंत शौचालय की विशिष्टि दी गयी थी, पर परिषद कार्यालय ने छह सीटर के लिए ही जेम पर निविदा प्रकाशित की और उसी के अनुसार आपूर्ति ले ली. ऑडिटरों के भौतिक निरीक्षण के क्रम में पाया गया कि एक हजार लीटर पानी टैंक के बदले केवल पांच सौ लीटर के पानी टैंक ही लगे थे, जो आइएसआइ मार्का के नहीं थे. साथ ही, शेष तीन की टंकी टूटी हुई पायी गयी. चारों तरफ चेचिस पैनल में जंग लगा हुआ था. इलेक्ट्रिकल प्वाइंट की भी व्यवस्था नहीं पायी गयी.

सुरक्षित राशि 2.28 लाख रुपये की कटौती नहीं

कार्यादेश की बिंदु संख्या 03 के अनुसार, विपत्र की कुल राशि का 10 प्रतिशत सुरक्षित जमा राशि के रूप में काटा जाना था, जिसका भुगतान वारंटी अवधि समाप्त होने के बाद किया जाना था. परंतु यह पाया गया कि बिना 10 प्रतिशत सुरक्षित राशि (2.28 लाख) की कटौती किये ही पूर्ण भुगतान कर दिया गया.

महालेखागार की चार सदस्यीय टीम ने किया था ऑडिट

नगर परिषद के कार्यों की ऑडिट महालेखागार के चार सदस्यीय ऑडिटरों की टीम ने किया था, जिसमें ऑडिट ऑफिसर राजीव कुमार, असिस्टेंट ऑडिटर सुमित कुमार, ओमप्रकाश सिंह व विकास कुमार श्रीवास्तव की टीम ने अप्रैल 2015 से अप्रैल 2022 तक का ऑडिट 27 मई से 11 जुलाई 22 तक किया था. उस दौरान नगर परिषद में कदम-कदम पर घोटाला सामने आया.

ऑडिट रिपोर्ट आने पर जारी किया गया नोटिस

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अजय कुमार ने बताया कि जहां-जहां गड़बड़ियां सामने आयी हैं, नोटिस भेजकर उसका निदान कराया जा रहा है.

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By Shailesh kumar

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