gopalganj news : खामोश वोटरों के बीच जदयू को अपना किला बचाने, तो कांग्रेस को सीट कब्जाने की चुनौती

gopalganj news : कुचायकोट सीट : कुल वोट 2.99 लाख, पुरुष 160698, महिला 138397, थर्ड जेंडर 19 व प्रत्याशी सातसबसे अधिक मतदाता ब्राह्मण कुल वोटरों के 18%, वैश्य 16%, कोइरी, मुसलमान, राजपूत, भूमिहार व एसटी वोटर निर्णायक

कुचायकोट. जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर कुचायकोट की राजनीति हमेशा से समृद्ध रही है. यहां की मिट्टी की तासीर ही ऐसी है कि हर व्यक्ति राजनीति में अपनी परिपक्व समझ रखता है.

अगर आप ध्यान से सुनें, तो यहां राजनीति की गूंज हर ओर सुनाई देती है. मोंथा चक्रवात में सावन जैसी रिमझिम फुहारों के बीच से ठंडी पुरवा हवा में भी चुनावी ताप से हर व्यक्ति तप रहा है. चाय की दुकान से लेकर चौक, बस अड्डा, रेलवे स्टेशन यहां तक की ट्रेनों में भी चर्चा इस बात का ही है कि इस बार कौन बाजी मार रहा. यहां एक ओर जदयू के विधायक अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू पांडेय प्रत्याशी हैं, तो दूसरी ओर इंडिया गठबंधन ने कांग्रेस से हरिनारायण सिंह कुशवाहा पर भरोसा जताते हुए चुनाव में उतरा है. अमरेंद्र कुमार पांडेय वर्ष 2005 से अब तक लगातार इस क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां के रग-रग से वाकिफ हैं. यहां पिछली बार भोरे के रहने वाले दुबई के उद्योगपति हरिनारायण सिंह निर्दलीय चुनाव लड़े थे. जबकि, उनकी भावह सुनीता सिंह कुशवाहा रालोसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी. सुनीता सिंह ने 33533 वोट, तो हरिनारायण सिंह ने 2687 वोट लिया था. अब कांग्रेस ने उनको चुनावी मैदान में उतार दिया. यहां बदलाव के लिए वोटरों को एक करने में जुटे हैं. यहां जंग जातीय, समुदाय, घात व प्रतिघात की दिख रही है. कुचायकोट के वोटर खामोश हैं. हम जब सासामुसा स्टेशन रोड में पहुंचे, तो वहां रामजी प्रसाद, वीरेंद्र चौरसिया, पिंटू मिश्रा चुनावी चर्चा में डूबे थे. उनकी चर्चा पर गौर करें, तो कुचायकोट की रण में सात याेद्धा हैं. मगर मुख्य मुकाबला तो जदयू के विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय और कांग्रेस के हरिनारायण सिंह के बीच ही है. बसपा से बलिराम सिंह, जनसुराज से रिटायर आइएएस विजय चौबे, जागरूक जनता पार्टी के विश्वकर्मा शर्मा, जनशक्ति जनता दल से बृज बिहारी भट्ट उर्फ विपिन तिवारी व पूर्व सांसद काली प्रसाद पांडेय के पुत्र पंकज पांडेय भी निर्दलीय अपना नया समीकरण को बनाने में जुटे हैं, जो जदयू व कांग्रेस दोनों के लिए बड़ी चुनौती है. स्थानीय राजनीतिक जानकार अखिलेश सिंह कहते हैं कि यहां चुनावी जंग काफी रोचक हो गया है. यहां अपने गढ़ को बचाने व सेंधमारी करने की जंग चल रही है. पूरा विपक्ष बदलाव की वकालत कर रहा, जबकि वोटर खामोश हैं.

कुचायकोट सीट पर 10 बार ब्राह्मणों का रहा है कब्जा

कुचायकोट विधानसभा सीट पर 10 बार ब्राह्मणों का कब्जा रहा है, तो चार बार भूमिहार से विधायक रहे हैं. 1951 में कांग्रेस से शिवकुमार पाठक, 1957 में वाचस्पति शर्मा, तो 1967 में नगीना राय, उसके बाद बच्चा चौबे, सिंहेश्वर शाही, किरण राय और वर्ष 2005 से अबतक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय का कब्जा है. 1995 में कांग्रेस के बच्चा चौबे विधायक बने. उसके बाद से यह सीट राजद व जदयू के कब्जे में है. कुचायकोट बाजार में जब पहुंचे, तो थाने के सामने एक चाय की दुकान पर उमेश कुशवाहा, वीरेंद्र राय, ज्योति भूषण, भूपेश सिंह ने कहा कि एनडीए के ही कुछ बड़े नेता बदलाव को हवा भी दे रहे. वह बड़े नेता कौन हैं, नाम पूछने पर चुप्पी साध लेते हैं. जदयू अपने वोटों के बिखराव को रोकने के लिए पूरी ताकत भी लगा दी है. वोटर तो सबकी सुन रहे. सबकी गोलबंदी को भी देख रहे. वे अपने हिसाब से वोट करने का माइंड सेट कर चुके हैं.

सासामुसा चीनी मिल बंद होने का दर्द

सासामुसा चीनी मिल 2017 में ब्वॉयलर के एझिंस्ट पाइप के फटने से नौ मजदूरों की मौत के बाद चीनी मिल पर ग्रहण लग गया. किसानों का लगभग 44 करोड़ रुपये मिल मालिकों की तिजोरी में बंद हो गये. सासामुसा चीनी मिल के बंद होने से यहां काम कर रहे एक हजार मजदूरों के परिवार व लाखों की संख्या में किसानों के घर पर आर्थिक संकट आ गया. नतीजा है कि यहां के अधिकतर घरों के युवा रोजी-रोटी की तलाश में परदेस में हैं. चीनी मिल को चालू कराने की ईमानदार कोशिश की जरूरत थी, जो नहीं हो सकी. इसका मलाल सबको है. सासामुसा के व्यवसायी प्रेम कुमार बताते हैं कि सासामुसा चीनी मिल इस बार प्रमुख मुद्दों में शामिल है.

जदयू को अपने विकास का सहारा

सिपाया ढाला में बादशाह चाय की दुकान पर बारिश की फुहार के बंद होने का इंतजार कर रहे निखिल तिवारी, उमेश यादव, धर्मेंद्र साह, पप्पू शुक्ला आपस में चुनाव की बातों में उलझे हुए थे. तभी प्रफुल्ल तिवारी ने कहा कि दियारा का यह इलाका जहां कभी दिन में लोग आने से कतराते थे. आज सैनिक स्कूल, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज जैसे शिक्षण संस्थानों ने माहौल को ही बदल दिया है, तो धर्मेंद्र साह ने कहा कि कुछ भी कहिये जदयू तो अपने विकास के दम पर ही जीत का दावा कर रहा, तो उमेश यादव ने जर्जर सड़कों की दुर्दशा को याद दिलाते हुए कहा कि वोट तो गोलबंदी के हिसाब से ही मिलेगा.

कांग्रेस को इंडिया गठबंधन के कोर वोटरों पर भरोसा

कांग्रेस को इंडिया गठबंधन के कोर वोटरों पर भरोसा है. कांग्रेस का दावा इस बार कुशवाहा, यादव, मुस्लिम के अलावा एनडीए के भीतर घात-प्रतिघात वाले वोटों पर नजर है. एनडीए के किला में सेंधमारी कर जीत तय करने का भरोसा है. चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो वक्त बतायेगा, लेकिन यहां का चुनावी जंग काफी रोचक व कांटे की बनी हुई है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Shailesh kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >