गोपालगंज के प्लस टू स्कूलों में सफाई व्यवस्था बदहाल, एजेंसियों को जिम्मेदारी फिर भी शौचालयों में गंदगी

गोपालगंज के प्लस टू स्कूलों में स्वच्छता की स्थिति चिंताजनक है. निजी एजेंसियों को साफ-सफाई की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बावजूद कई विद्यालयों में व्यवस्था बदहाल है. खासकर शौचालयों की गंदगी से छात्रों को परेशानी हो रही है.

गोपालगंज: जिले के प्लस टू स्कूलों में विद्यार्थियों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए साफ-सफाई और शौचालयों की देखभाल की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को सौंपी गयी है. प्रखंडवार एजेंसियां निर्धारित होने के बावजूद कई विद्यालयों में सफाई व्यवस्था बदहाल होने की शिकायत सामने आ रही है. स्कूल परिसर से लेकर शौचालय तक नियमित सफाई नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सफाई की जिम्मेदारी एजेंसियों को दी गयी है, तो फिर विद्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं दिख रहा है.

शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों में साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर रखने के लिए निजी एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गयी है. एजेंसियों के माध्यम से विद्यालय परिसर, कक्षाओं के आसपास के क्षेत्र और शौचालयों की नियमित सफाई करायी जानी है. इसके अलावा शौचालयों को साफ और उपयोग योग्य बनाए रखना भी एजेंसियों की जिम्मेदारी है. लेकिन कई विद्यालयों में स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है. शौचालयों में गंदगी, दुर्गंध और पानी की समस्या के कारण विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ रही है.

इन प्रखंडों में इन एजेंसियों को जिम्मा

प्रखंडवार सफाई व्यवस्था के लिए अलग-अलग एजेंसियों की जिम्मेदारी निर्धारित की गयी है. बैकुंठपुर प्रखंड में फुल्केश्वर ट्रेडर्स को सफाई व्यवस्था का जिम्मा दिया गया है. वहीं बरौली में परवीन सिंह चौहान सेक्रेटरी प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी मिली है. पंचदेवरी और सिधवलिया प्रखंड में स्ट्रेन डेटनी प्राइवेट लिमिटेड को काम सौंपा गया है.

इसी तरह थावे, फुलवरिया और हथुआ प्रखंड में विजन टेक्नोलॉजी को सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गयी है. कुचायकोट, कटेया और विजयीपुर प्रखंड में एचटेंड इंडेक्स प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मा सौंपा गया है. वहीं गोपालगंज, मांझा, उचकागांव और भोरे प्रखंड की सफाई व्यवस्था नेशनल सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड के जिम्मे है.

छात्राओं के लिए शौचालय की स्थिति अहम

विद्यालयों में शौचालयों की साफ-सफाई सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में शामिल है. गंदे और दुर्गंधयुक्त शौचालयों के कारण विद्यार्थियों को परेशानी होती है. छात्राओं के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है. नियमित सफाई नहीं होने और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं रहने से स्वच्छता संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में स्कूलों में शौचालयों की नियमित सफाई और उनकी स्थिति की निगरानी बेहद जरूरी है.

अचानक जांच हो तो खुल सकती है पोल

सफाई एजेंसियों के काम की निगरानी के लिए विद्यालय स्तर पर नियमित सत्यापन जरूरी है. केवल कागज पर सफाई पूरी दिखाने के बजाय यह भी जांच होनी चाहिए कि संबंधित एजेंसी ने वास्तव में कितने दिन काम कराया और कितने कर्मियों को सफाई के लिए लगाया गया. इसके लिए भौतिक सत्यापन किया जाना जरूरी है.

शिक्षा विभाग की ओर से यदि जिले के सभी प्लस टू स्कूलों में औचक निरीक्षण कराया जाए, तो कागजी दावों और जमीन पर सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का अंतर सामने आ सकता है. लापरवाही मिलने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ उसके भुगतान की भी समीक्षा की जानी चाहिए.

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By Prabhat khabar news desk

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