(गोपालगंज से प्रशांत पाठक की रिपोर्ट)
Gopalganj News: शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी योजना ‘फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी’ (FLN) प्रशिक्षण कार्यक्रम में ई-शिक्षा पोर्टल की एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई है. तकनीकी खामियों और डेटा अपडेट नहीं होने के कारण उन शिक्षकों के नाम भी प्रशिक्षण सूची में शामिल कर दिए गए हैं, जो या तो दूसरे प्रखंडों में स्थानांतरित हो चुके हैं या फिर सेवा से त्यागपत्र दे चुके हैं. इस गड़बड़ी से विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने लगी है.
डेटा अपडेट नहीं होने से बढ़ी प्रशासनिक परेशानी
हाल ही में FLN प्रशिक्षण के लिए जारी सूची की समीक्षा में कई विद्यालयों का डेटा त्रुटिपूर्ण पाया गया है. सूची में ऐसे शिक्षकों के नाम दर्ज हैं, जो महीनों पहले अपने मूल विद्यालय से विरमित हो चुके हैं. शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि स्थानांतरण और त्यागपत्र से संबंधित सूचनाओं को समय पर ई-शिक्षा पोर्टल पर अपडेट नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है.
गलत रिकॉर्ड के कारण रिक्त पद नहीं हो पा रहे चिन्हित
पोर्टल में पुराने शिक्षकों के नाम दर्ज रहने से संबंधित पदों को अब भी भरा हुआ दिखाया जा रहा है. परिणामस्वरूप वास्तविक रिक्तियों की पहचान नहीं हो पा रही है और नए शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति अथवा पदस्थापन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. इससे विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता और कम हो गई है.
पठन-पाठन व्यवस्था पर पड़ रहा सीधा असर
पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों में यह तकनीकी गड़बड़ी नई चुनौती बन गई है. पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण छात्रों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है. कई विद्यालयों में एक शिक्षक को कई कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है.
डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम पर उठे सवाल
ई-शिक्षा पोर्टल में सामने आई इस विसंगति ने शिक्षा विभाग की डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि पोर्टल पर दर्ज आंकड़े वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते हैं, तो विभागीय योजनाओं और संसाधनों के प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है.
डेटा ऑडिट और सुधार की मांग तेज
शिक्षाविदों और स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग से ई-शिक्षा पोर्टल का विशेष डेटा ऑडिट कराने की मांग की है. उनका कहना है कि स्थानांतरण, विरमण और त्यागपत्र से संबंधित जानकारी को तत्काल अपडेट कर वास्तविक रिक्तियों का निर्धारण किया जाए, ताकि विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सके और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो.
शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता उसके सटीक और अद्यतन डेटा पर निर्भर करती है. ऐसे में ई-शिक्षा पोर्टल की खामियों को दूर करना शिक्षा विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य पूरा किया जा सके.
इसे भी पढ़ें: गर्मी से झुलस रहा बिहार, इन जिलों में लोगों का हाल बेहाल, मौसम बदलने की उम्मीद
